Mauni Amavasya Aarti (मौनी अमावस्या की आरती लिरिक्स): मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य मौन रहकर आत्मचिंतन और भक्ति में लीन होना है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार, इस दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस दिन दान-पुण्य और पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है और व्यक्ति का मन शांत, एकाग्र एवं निरोधित रहता है। इस कारण से इसे माघ अमावस्या के साथ-साथ मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है। इस दिन पितरों की आरती करना विशेष लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। साथ ही, इस दिन शिव जी और मां गंगा की आरती भी करना अत्यंत पुण्यकारी होता है।

Mauni Amavasya 2026 LIVE: शुभ योग में मौनी अमावस्या, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, मंत्र और नियम सहित हर एक जानकारी

मौनी अमावस्या की आरती (Mauni Amavasya Aarti)

।।शिव जी की आरती।। (Shiv Ji Aarti Lyrics)

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

॥ श्री गंगा मैया आरती ॥ (Maa Ganga Aarti Lyrics)

नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्,
सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं,
भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥

हर हर गंगे, जय माँ गंगे,
हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥

ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥

चंद्र सी जोत तुम्हारी,
जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी,
सो नर तर जाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

पुत्र सगर के तारे,
सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी,
त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

एक ही बार जो तेरी,
शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर,
परमगति पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

आरती मात तुम्हारी,
जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में,
मुक्त्ति को पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता,

मनवांछित फल पाता ॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

पितरों का आरती (Pitra Aarti Lyrics)

जय जय पितरजी महाराज,मैं शरण पड़यो हूँ थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा,शरण पड़यो हूँ थारी॥
आप ही रक्षक आप ही दाता,आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू,आप ही हो रखवारे॥ जय जय पितरजी महाराज

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी,है ये अरज गुजारी॥
जय जय पितरजी महाराज।

देश और परदेश सब जगह,आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको,लगे बहुत सुखदाई॥
जय जय पितरजी महाराज।

भक्त सभी हैं शरण आपकी,अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी,रटूं मैं बारम्बार॥
जय जय पितरजी महाराज।

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