प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। जो इस बार 21 अप्रैल को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इसका काफी महत्व माना जाता है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए लोग इस दिन व्रत रखते हैं। मासिक शिवरात्रि के बाद अमावस्या तिथि पड़ेगी। वैशाख माह की अमावस्या का भी काफी महत्व माना जाता है जो इस बार 22 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा मेष राशि में होंगे।
मासिक शिवरात्रि का महत्व: कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव से मासिक शिवरात्रि का व्रत करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि के बंधनों से भी मुक्त हो जाता है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करना फलदायी माना गया है। शिवलिंग का जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, चीनी, गंगाजल तथा गन्ने के रस से अभिषेक कराने के बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, समीपत्र, कुशा तथा दुर्बा चढ़ाएं। पूजा के बाद घी का दीपक जलाएं। शिव जी को केसर युक्त चावल की खीर का भोग लगाएं।
वैशाख अमावस्या का महत्व: पूर्णिमा के दिन चांद बड़ा और चमकदार दिखाई देता है तो अमावस्या के दिन आकाश में गायब हो जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि को बेहद ही पवित्र माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध कर्म, दान पुण्य के कार्य करना और पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में आ जाते हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठें। सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। जरूरमंदों को दान-दक्षिणा दी जाती है। अमावस्या जब सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या और जब शनिवार के दिन पड़ती है तो उसे शनि अमावस्या कहते हैं। पितृ दोष और कालसर्प दोष निवारण की पूजा करने के लिए भी अमावस्या का दिन उपयुक्त होता है। अमावस्या को अमावस या अमावसी के नाम से भी जाना जाता है।

