Yog For Marriage: हमारी ज़िंदगी में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें हम नहीं चुनते नहीं बल्कि किस्मत खुद हमें उनसे मिलाती है। विवाह केवल एक सामाजिक या भावनात्मक बंधन नहीं होता। यह जीवन का वह सुंदर मोड़ है, जहां किस्मत दो आत्माओं को मिलाने का माध्यम बनती है। किस्मत के साथ-साथ कुछ विशेष ग्रह एक साथ सक्रिय होना भी शामिल है। ज्योतिषीय दृष्टि से विवाह केवल रोमांटिक संबंध नहीं है, बल्कि यह दो आत्माओं का संगम है। कर्मों की प्रगति और आत्मिक विकास के लिए। कुछ विवाह प्रयास से होते हैं, जबकि कुछ ब्रह्मांड की योजना से। जब ये ग्रह योग आकाश में बनते हैं, तब सबसे संशयवादी हृदय भी मान लेता है कि प्रेम वास्तव में सितारों में लिखा होता है। टैरो कार्ड रीडर और न्यूमरोलॉजिस्ट पूजा वर्मा से जानते हैं कि किसी विवाह में ग्रहों का क्या महत्व है…

दैवीय मिलन कराने वाले ग्रह शुक्र और बृहस्पति

शुक्र (Shukra) प्रेम, आकर्षण और इच्छाओं का प्रतीक है, जबकि बृहस्पति (Guru) आशीर्वाद, धर्म और विस्तार का ग्रह है। जब ये दोनों शुभ ग्रह एक साथ आते हैं या एक-दूसरे पर अच्छी दृष्टि डालते हैं, तो जीवन में शुभ फल मिलते हैं। तब सुहाग योग बनता है। ऐसे विवाह दैवी समय पर ही होते हैं। ऐसे लोग अक्सर अपने जीवनसाथी से किस्मत के इशारे पर मिलते हैं, न कि किसी योजना से। उनके रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव धीरे-धीरे अपने आप बनता है, चाहे शादी पारंपरिक हो या अरेंज मैरिज।

सप्तम भाव का सक्रिय होना, जब विवाह का द्वार खुलता है

ज्योतिष में सप्तम भाव (7th House) विवाह और साझेदारी का भाव होता है। जब इसका स्वामी शुभ स्थिति में हो और उस पर शुक्र, बृहस्पति या चंद्रमा की शुभ दृष्टि पड़े, और उचित दशा चले, तब विवाह लगभग सहजता से हो जाता है। यह अनुभव ऐसा होता है मानो सबकुछ स्वयं अपने आप जुड़ गया, कोई आकस्मिक मुलाकात, अचानक आया विवाह प्रस्ताव, या कोई पुराना मित्र जो जीवनसाथी बन जाता है।

नियति का कारक राहु और केतु का रहस्यमय प्रभाव

राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो अक्सर भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन जब ये शुभ प्रभाव में हों और अन्य लाभकारी ग्रहों से समर्थित हों, तो ये कर्मिक बंधन बनाते हैं। चाहे व्यक्ति चाहे या न चाहे। उदाहरण के लिए, सप्तम भाव में राहु का होना असामान्य या विदेशी जीवनसाथी का संकेत दे सकता है, जबकि केतु इस भाव में हो तो वह पिछले जन्म से जुड़ा आत्मिक रिश्ता दर्शा सकता है। ऐसे संबंधों में अक्सर एक रहस्यमयी आकर्षण होता है । मानो आत्माएं एक-दूसरे को पहले से पहचानती हों।

नवांश कुंडली शादी को समझने की कुंजी

“नवांश कुंडली ही विवाह का वास्तविक सत्य बताती है।” चाहे जन्म कुंडली में विवाह के संकेत हों या न हों, नवांश (D9) कुंडली विवाह के भाग्य और समय का खुलासा करती है। यदि इसमें शुक्र, बृहस्पति या चंद्रमा बलवान हों और सप्तम या नवम भाव से संबंध रखते हों, तो यह दर्शाता है कि विवाह नियति द्वारा निश्चित है। कभी-कभी जन्म कुंडली में विलंब या कठिनाइयाँ दिखाई देती हैं, लेकिन जब नवांश सक्रिय होता है, तो विवाह शुभ, स्थिर और भाग्यशाली सिद्ध होता है।

नवम भाव का वरदान यानी कर्म और दैवी कृपा

नवम भाव “भाग्य भाव” कहलाता है, और इसका प्रभाव गहरा होता है। जब सप्तम भाव का स्वामी नवम भाव या उसके स्वामी से जुड़ता है, तो भाग्य-विवाह योग बनता है। इसका मतलब है दैवी इच्छा से हुआ विवाह। इस योग वाले लोगों के विवाह अक्सर अचानक रूप से या किसी दैवी संयोग से होते हैं जैसे यात्रा, शिक्षा, या धार्मिक आयोजन में जीवनसाथी से मुलाकात।

नए साल 2026 में देवताओं के गुरु बृहस्पति कई राजयोगों का निर्माण करने वाले हैं। वह नए साल में मिथुन, कर्क के साथ सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में वह साल के आरंभ में ही चंद्रमा के साथ युति करके गजकेसरी राजयोग का निर्माण करेंगे। ऐसे में 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिलने वाला है। लेकिन इन तीन राशि के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। जानें इन लकी राशियों के बारे में

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डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।