Weekly Festival (02 March To 08 March): हिंदी पंचांग के मुताबिक इस सप्ताह (2-8 मार्च) दो प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ने वाले हैं। जिसमें से एक प्रदोष व्रत है जो 07 मार्च, शनिवार को है। प्रदोष व्रत शिव की पूजा के लिए खास माना गया है। शनिवार के दिन पड़ने के कारण ये शनि प्रदोष व्रत कहलाता है। शनि प्रदोष व्रत शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति के लिए खास होता है। शनि प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की पूजा का भी विधान है। वहीं 06 मार्च को आमलकी एकादशी है।

आमलकी एकादशी (06 मार्च): पंचांग के मुताबिक फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के तौर पर मनाया जाता है। आमतौर पर यह एकादशी महाशिवरात्रि और होली के बीच पड़ती है। आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।

कैसे करें पूजा: आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर  लें। इसके बाद भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करें। अगर आंवले का वृक्ष उपलब्ध न हो तो आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद स्वरूप अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और खुद भी खाएं। माना जाता है कि इस दिन आंवले का सेवन जरूर करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक आमलकी एकादशी पर आंवले का सेवन भी पाप का नाश करता है।

शनि प्रदोष दोष व्रत (07 मार्च): शनि प्रदोष व्रत 07 मार्च, शनिवार को पड़ रहा है। जब शनिवार को प्रदोष व्रत पड़ता है तो वह शनि प्रदोष व्रत के तौर पर मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से शनि शनि दोष से छुटकारा मिलता है।

प्रदोष व्रत पूजा-विधि: प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद और रात होने के पहले का वक्त होता है। इसी प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। इस दिन व्रती को सुबह में स्नान करने के बाद बिल्वपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप, इत्यादि से भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की आराधना के लिए कुश के आसन का उपयोग करना चाहिए। पूजन के समय पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए। पूजन की समाप्ति पर भगवान शिव की विधिपूर्वक आरती करें।