सूर्य जब जब अपनी राशि बदलते हैं तब तब संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य हर माह में अपना राशि परिवर्तन करते हैं। इस तरह साल में कुल 12 संक्रांति मनाई जाती है। लेकिन सभी संक्रांतियों में मकर संक्रांति के दिन का खास महत्व होता है। हिंदू धर्म में इस दिन स्नान दान करने की परंपरा है। लेकिन इस बार संक्रांति की तिथि को लेकर कुछ कन्फ्यूजन बना हुआ है। कुछ लोग 14 जनवरी तो कुछ 15 जनवरी को संक्रांति मनाने की बात कह रहे हैं। आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन इस बार सूर्य का राशि परिवर्तन 15 जनवरी को होने के कारण इसी दिन मकर संक्रांति मनाई जायेगी। जानिए हिंदुओं के इस बड़े पर्व के बारे में…

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त:
मकर संक्रान्ति डेट – 15 जनवरी, दिन बुधवार
मकर संक्रान्ति पुण्य काल – 07:15 ए एम से 05:46 पी एम
अवधि – 10 घण्टे 31 मिनट्स
मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल – 07:15 ए एम से 09:00 ए एम
अवधि – 01 घण्टा 45 मिनट्स
मकर संक्रान्ति का क्षण – 02:22 ए एम

क्या है मकर संक्रांति? शास्त्रों में तीर्थ स्नान, जप, पूजा-पाठ, दान, तर्पण व श्राद्ध इत्यादि का काम मकर संक्रांति पर करना काफी उत्तम माना गया है। इतना ही नहीं गोदान, भूदान व स्वर्णदान के लिए भी यह दिन सर्वोत्तम है। ज्योतिषीय आधार व धार्मिक मान्यतानुसार मकर संक्रांति के दिन ही भगवान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। इस कारण अनेक जगहों पर मकर संक्रांति को ‘उदय पर्व’ या ‘उत्तरायणी’ भी कहा जाता है।

मकर संक्रांति पर क्या करें? मकर संक्रांति पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध-तर्पण का कार्य करना चाहिए इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन तिलों का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। इस बारे में शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि मकर संक्रांति के दिन जो व्यक्ति तिल का प्रयोग छह प्रकार से करता है, वह अनंत सुख पाता है। तिल मिश्रित जल से नहाना, तिल का तेल शरीर पर लगाना, पितरों का तिलयुक्त जल से तर्पण करना, अग्नि में तिलों का हवन करना, ब्राह्मण या बहन-बेटी को तिलों से बने पदार्थों का दान देना और तिल खाना।

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मकर संक्रांति को लेकर ये है मान्यता: पौराणिक मान्यतानुसार मकर संक्रांति के दिन से ही दिव्य लोकों में विराजमान देवताओं के दिन का प्रारंभ भी होता है। क्योंकि उत्तरायण के काल को देवताओं का दिन तो दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि। धार्मिक मान्यतानुसार देवताओं का एक दिन हमारे छह महीनों के बराबर होता है, इसलिए मकर संक्रांति को देवताओं के दिन का ‘प्रभात काले’ कहा गया है। इसलिए देवताओं का प्रभात काल होने से ही मकर संक्रांति के दिन किया जाने वाला ‘दान’ सौ गुना हो जाता है।