Mahavir Jayanti 2020 Date in India: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था। ये दिन जैन धर्म के लोगों के लिए विशेष रूप से महत्व रखता है। अहिंसा परमो धर्म: अर्थात अहिंसा सभी धर्मों से सर्वोपरि है। यह संदेश उन्होंने पूरी दुनिया को दिया व संसार का मार्गदर्शन किया। ‘जियो और जीने दो’ का मूल मंत्र इन्हीं की देन है। महावीर जयंती के दौरान, दुनिया भर से लोग भारत के जैन मंदिरों में दर्शन करने के लिए आते हैं। जैनों द्वारा भगवान महावीर की प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली जाती है। लेकिन इस बार कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण महावीर जयंती के मौके पर न तो जैन मंदिरों में सामूहिक पूजा होगी और न ही कोई कार्यक्रम।

लॉकडाउन के चलते महावीर जयंती पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा व प्रभातफेरियां भी नहीं निकलेंगी। ऐसे में घर पर ही रहकर शांतिपाठ करना होगा। इस मौके पर जैन समाज के लोग मुनि प्रज्ञा सागर की बताई पूजा विधि के अनुसार घर में बैठकर ही भगवान महावीर स्वामी की अष्टदृव्यों से भाक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर शाम को 13 दीपकों से आरती करेंगे।

महावीर जंयती का इतिहास (Mahavir Jayanti History And Significance):

महावीर जयंती जैन और अन्य धर्मों द्वारा महान संत महावीर की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। जैनियों के 24 वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे, जिन्होंने जैन धर्म की खोज के साथ, जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांतों की स्थापना की। महावीर जी का जन्म एक राज परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला था। इनके बचपन का नाम वर्धमान था। इनका जन्म ईसा से 599 वर्ष पहले चैत्र शुक्ल की त्रयोदशी के दिन हुआ था।महावीर जी के जन्म दिवस को ही महावीर जयंती के नाम से जाना जाता है। महावीर जी जन्म बिहार के कुण्डग्राम में हुआ था। यह बचपन से वर्धमान का स्वाभाव वीरों जैसा था। इसलिए इनका नाम महावीर पड़ा। महावीर जी को अपने जीवन में किसी प्रकार की कोई परेशानी नही थी क्योंकि उनका जन्म एक राजसी परिवार में हुआ था। लेकिन फिर भी दुनिया को ज्ञान देने के लिए वह एक संत बन गए।

एक राजकुमार होने के बाद भी उनका मन राजपाठ में नही लगता था। उनके पिता ने जब उनका विवाह यशोधरा से करना चाहा तो वह उसके लिए भी तैयार नही थे।लेकिन पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने यशोधरा से विवाह कर लिया। महावीर जी की एक पुत्री प्रियदर्शना भी थी जो अत्यंत ही सुंदर थी। श्वेताम्बर सम्प्रदाय के लोग मानते हैं कि उनका विवाह यशोद्धरा से हुआ था। लेकिन दिगंबर सम्प्रदाय के लोग मानते हैं कि उनका विवाह हुआ ही नही था। महावीर जी ने 30 वर्ष की उम्र में अपने घर का त्याग किया और सच्चे ज्ञान की तलाश में भटकने लगे। जिसके बाद वह एक अशोक के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया करते थे।

लगभग साढ़े 12 साल के बाद उन्हें सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वें और अंतिम तीर्थकर बने। इसके बाद महावीर जी ने अलग- अलग स्थानों में जाकर जैन धर्म का प्रचार किया। उन्होंने लोगों को सही मार्ग दिखाकर अच्छा जीवन जीने की प्रेरणा दी।