Mahashivratri 2025 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List, Muhurat Timing, Vrat Katha, Aarti, Bhagwaan Shiv Ki Puja Vidhi: आज पूरे देश में धूमधाम के साथ महाशिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है। यह धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने वैराग्य का त्याग कर वैवाहिक जीवन को अपनाया था।

शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शिवजी और माता पार्वती की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। बता दें कि इस साल महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, शिव चालीसा, शिव आरती, ज्योतिषीय उपाय सहित अन्य जानकारी….

Mahashivratri 2025 Date, Puja Vidhi, Muhurat | Mahamrityunjaya Mantra Lyrics

कब है महाशिवरात्रि 2025 (Mahashivratri 2025 Kab Hai)

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी 2025 को सुबह 11:08 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी को सुबह 8:54 बजे तक रहेगी। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि में की जाती है, इसलिए इस साल यह पर्व 26 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं और भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

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महाशिवरात्रि चारों प्रहर पूजा समय (Mahashivratri Char Prahar Puja Time 2025)

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 26 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक

Shiv Chalisa Lyrics: महाशिवरात्रि पर करें शिव चालीसा का पाठ, भगवान शिव होंगे प्रसन्न, जय गिरिजा पति दीन दयाला, सदा करत संतन प्रतिपाला चालीसा…

महाशिवरात्रि पूजा सामग्री (Mahashivratri Puja Samagri)

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा विधि-विधान से करें। पूज करने से पहले ही पूरी सामग्री इकट्ठा कर लें, जिससे पूजा के समय किसी भी प्रकार का विघ्न उत्पन्न न हो। पूजा थाली में फूल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, भस्म, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बाली, मंदार के फूल, गाय का दूध, दही, बेर, शुद्ध देशी घी, गन्ने का रस, शहद, गंगाजल,पांच तरह के फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, कपूर, धूप, दीपक, रूई, चंदन शिव व पार्वती जी की श्रृंगार सामग्री, वस्त्राभूषण रत्न, दक्षिणा, कुशासन, पूजा के बर्तन आदि।

धन- समृद्धि के लिए महाशिवरात्रि पर करें इस स्त्रोत का पाठ, महादेव होंगे प्रसन्न, करियर और कारोबार में बनेंगे तरक्की के योग

Live Updates
07:44 (IST) 26 Feb 2025
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजन मुहूर्त (Maha Shivratri 2025 Char Prahar Pujan Muhurat)

निशिथ काल का समय- 27 फरवरी को निशित काल रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर 12 बजकर 59 मिनट तक

प्रथम पहर पूजन का समय – 26 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक

दूसरा पहर के पूजन का समय – 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक

तीसरे पहर के पूजन का समय- 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक

चौथे पहर के पूजन का समय – 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक

07:38 (IST) 26 Feb 2025
महाशिवरात्रि 2025 की पूजा विधि (Maha Shivratri 2025 Puja Vidhi)

महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, भस्म और मंदार के फूल अर्पित करें। साथ ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें। इस दिन सुहागन महिलाओं को माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि की रात जागरण कर शिव मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।

21:58 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि चारों प्रहर पूजा समय (Mahashivratri Char Prahar Puja Time 2025)

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 6 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक

21:21 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि 2025 पूजा विधि (Mahashivratri 2025 Puja Vidhi)

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक कर सकते हैं या फिर घर पर ही साधारण तरीके से पूजा कर सकते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद शिव जी का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, पंचामृत, गन्ने का रस आदि चढ़ाने के बाद भस्म, सफेद चंदन, बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, बेर, गन्ना आदि चढ़ाने के साथ फल, मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर शिव आरती, शिव चालीसा, शिव स्तुति और मंत्र का जाप कर लें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें और दिनभर फलाहार या फिर जल पीकर ही व्रत रखें।

21:15 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि पर बन रहा दुर्लभ संयोग, इन 3 राशियों को मिलेगा लाभ (Mahashivratri 2025)

पंचांग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जा रही है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन काफी दुर्लभ योग का निर्माण हो रहा है, जिससे कुछ राशियों के ऊपर शिव जी की विशेष कृपा हो सकती है। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ें पूरी खबर…

https://www.jansatta.com/religion/mahashivratri-2025-shubh-sanyog-rare-and-auspicious-yoga-form-on-maha-shivratri-these-zodiac-sign-will-be-shine-kab-hai-maha-shivratri/3810465/

20:39 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

-ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।

श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।

विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।

जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥

19:53 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि 2025 पर शुभ योग (Mahashivratri 2025 Shubh Yog)

वैदिक पंचांग के अनुसार त्रिग्रही योग बन रहा है। यह योग शनि, बुध और सूर्य के संयोग से बनेगा। ज्योतिष में त्रिग्रही योग को बेहद शुभ माना गया है।

19:42 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि चारों प्रहर पूजा समय (Mahashivratri Char Prahar Puja Time 2025)

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 6 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक

19:13 (IST) 25 Feb 2025
जलाभिषेक के दौरान इन नियमों का करें पालन (Jalabhishek Puja Niyam)

जलाभिषेक के लिए सुबह का समय या प्रदोष काल का समय शुभ माना जाता है। जलाभिषेक के वक्त अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें। शिवलिंग पर जल हमेशा तांबे या पीतल के लोटे से ही अर्पित करें। स्टील के लोटे का इस्तेमाल न करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय “ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। इस बात का ध्यान रखें कि धीरे-धीरे धारा के रूप में शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

18:28 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि 2025 पर जलाभिषेक का मुहूर्त (Mahashivratri 2025 Rudrabhishek Muhurat)

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। इस साल महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक सुबह के समय से ही कर सकते हैं। पंचांग के अनुसार, प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6 बजकर 47 बजे से सुबह 9 बजकर 42 बजे तक रहेगा। इसके बाद मध्यान्ह मुहूर्त सुबह 11 बजकर 06 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 बजे तक रहेगा। फिर संध्याकालीन मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 25 बजे से शाम 6 बजकर 08 बजे रहेगा। इसके साथ ही आखिरी जलाभिषेक का मुहूर्त यानी रात्रिकालीन मुहूर्त 8 बजकर 54 मिनट पर शुरू होकर रात 12 बजकर 01 बजे तक रहेगा।

18:09 (IST) 25 Feb 2025
महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप (Maha Mrityunjaya Mantra )

महाशिवरात्रि के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से हर दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ!!

17:42 (IST) 25 Feb 2025
152 साल बाद महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग (Mahashivratri 2025 Shubh Yog)

इस बार कई सालों बाद महाशिवरात्रि पर ग्रहों के दुर्लभ योग भी बन रहे हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे, इसके साथ राहु भी रहेंगे। ये एक शुभ योग है। इसके अलावा सूर्य-शनि कुंभ राशि में रहेंगे। ये लोग लगभग 152 साल बाद बन रहे हैं।

16:36 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप (Mahashivratri Mantra)

महाशिवरात्रि के खास अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।

चंद्र बीज मंत्र- ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:’

चंद्र मूल मंत्र- ‘ॐ चं चंद्रमसे नम:’

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।

ॐ नमः शिवाय

ॐ हौं जूं स:

16:02 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Mahashivratri 2025 Date)

पंचांग के मुताबिक फाल्‍गुन कृष्‍ण चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का अंत 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर होगा। वहीं शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रि के प्रहर की पूजा विशेष मानी जाती है। ऐसे में महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी।

15:21 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि का महत्व (Mahashivratri 2025 Importance)

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन चंद्रमा अपनी सबसे कमजोर स्थिति में होता है। इसलिए भगवान शिव ने उसे अपने मस्तक पर धारण किया। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति भगवान शिव की अराधाना करता है तो उसकी कुंडली से चंद्र दोष भी दूर होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की उपासना करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

15:16 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि पर न करें ये काम (Mahashivratri 2025)

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी न करें। इसके अलावा इस दिन किसी को अपशब्द न कहें और न ही किसी से वाद-विवाद न करें। इस दिन भगवान शिव को तुलसी, केतकी का फूल, सिंदूर, शंख से जल आदि न चढ़ाएं।

15:02 (IST) 25 Feb 2025
महाशिवरात्रि चारों प्रहर पूजा समय (Mahashivratri Char Prahar Puja Time 2025)

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 6 फरवरी को शाम 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 26 मिनट तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 26 फरवरी को रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 27 फरवरी को सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक

14:29 (IST) 25 Feb 2025
किन लोगों को नहीं रखना चाहिए महाशिवरात्रि व्रत? (Mahashivratri 2025)

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य कई गुना प्राप्त होता है। इसलिए कई लोग इस व्रत को रखने की इच्छा रखते हैं। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इन लोगों को यह व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। खबर को पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Mahashivratri 2025: इन लोगों को नहीं रखना चाहिए महाशिवरात्रि व्रत, वरना बढ़ सकती है परेशानी, भोलेनाथ हो सकते हैं नाराज
14:13 (IST) 25 Feb 2025
कब है महाशिवरात्रि 2025 (Mahashivratri 2025 Kab Hai)

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी 2025 को सुबह 11:08 बजे से शुरू होकर 27 फरवरी को सुबह 8:54 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस साल यह पर्व 26 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा।

13:19 (IST) 25 Feb 2025
शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥

भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥

कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।

अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥