Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति के मौके पर पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन वाराणसी, हरिद्वार, प्रयागराज समेत देश के विभिन्न घाटों पर लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। माघ मास में स्नान करने का दूसरा सबसे शुभ मुहूर्त मकर संक्रांति के दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु संगम स्नान के बाद तिल, खिचड़ी, अन्न इत्यादि का दान करते हैं। दान के बाद भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। जानिए मकर संक्रांति पर किस शुभ मुहूर्त में स्नान करना रहेगा सबसे ज्यादा फलदायी…
मकर संक्रांति का मुहूर्त: सूर्य जब मकर राशि में गोचर करता है तब मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस बार सूर्य का राशि गोचर 15 जनवरी को हुआ है। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजे कर रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 45 मिनट की है। वैसे सुबह सवा सात से लेकर शाम 6 बजे तक मकर संक्रांति का मुहूर्त रहेगा।
माघ मेले में स्नान की विशेष तिथियां: माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से हो चुकी है। जिसका पहला स्नान पौष पूर्णिमा के दिन था। दूसरा स्नान मकर संक्रांति पर किया जायेगा। इस तिथि को तीर्थस्थलों पर स्नान करने मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता है। प्रयागराज के माघ मेले में स्नान के लिए मौनी अमावस्या का दिन भी बेहद शुभ माना जाता है। इस बार ये अमावस्या 24 जनवरी को पड़ रही है। जिस दिन शनि का राशि परिवर्तन भी होगा। अगला स्नान बसंत पंचमी यानी 30 जनवरी को किया जायेगा। फिर 9 फरवरी यानी माघी पूर्णिमा भी स्नान के लिए प्रमुख तिथि मानी गई है। आखिरी स्नान महाशिवरात्रि यानी 21 फरवरी के दिन होगा। इसी दिन माघ मेले का अंत भी हो रहा है।
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माघ मास में स्नान का महत्व: वैसे तो माघ मास के दौरान देश भर में कई जगहों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं लेकिन इसका विशेष आयोजन प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में देखा जाता है। पौष पूर्णिमा से लोग इन तीर्थस्थलों पर जुटना शुरू हो जाते हैं और महाशिवरात्रि तक यहां स्नान चलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्नान की सभी तिथियों में से मकर संक्रांति का स्नान और मौनी अमावस्या के दिन के स्नान को विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

