Magh Gupt Navratri 2026: सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि का खास महत्व है। इस साल की माघ गुप्त नवरात्रि का आरंभ 19 जनवरी से हो गया है और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा की गुप्त रूप से पूजा आराधना की जाती है। मतलब गुप्त नवरात्र रहस्यमय साधनाओं के लिए के लिए किए जाते हैं। वहीं पंचांग के अनुसार, माघी गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि 26 जनवरी, सोमवार को है, इस तिथि पर देवी महागौरी की पूजा की जाती है। वहीं गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि 27 जनवरी, मंगलवार को है, इस तिथि की मुख्य देवी सिद्धिदात्री हैं। वहीं यहां हम आपको ऐसे स्त्रोत और मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका पाठ करने से आपको सुख- समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं मंत्र और स्त्रोत के बारे में…

500 साल बाद बन रहा पावरफुल पंचग्रही योग, इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम, करियर और कारोबार में तरक्की के योग

मां दुर्गा के इन मंत्रों का करें जाप

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अधिक से अधिक अवश्‍य करें.

पिण्डज प्रवरा चण्डकोपास्त्रुता।
प्रसीदम तनुते महिं चंद्रघण्टातिरुता।।
पिंडज प्रवररुधा चन्दकपास्कर्युत । प्रसिदं तनुते महयम चंद्रघंतेति विश्रुत।

यह है मंगलकारी स्त्रोत

जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे।

जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥1॥ 

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे जय पावकभूषितवक्त्रवरे।

जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥2॥ 

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे जय लोकसमस्तकपापहरे।

जय देवि पितामहविष्णुनते जय भास्करशक्रशिरोवनते॥3॥ 

जय षण्मुखसायुधईशनुते जय सागरगामिनि शम्भुनुते।

जय दु:खदरिद्रविनाशकरे जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥4॥ 

जय देवि समस्तशरीरधरे जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे।

जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे॥5॥ 

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:।

गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥6॥ 

200 साल बाद बनने जा रहे शुक्रादित्य समेत 4 राजयोग, इन राशियों की चमक सकती है किस्मत, नई नौकरी के साथ अपार धनलाभ के योग

यह भी पढ़ें:

मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026
मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026
सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026
तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026
धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026
कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026