Lok Sabha Election 2019: पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी लोकसभा चुनाव के लिए आज यानि 26 मई 2019, शुक्रवार को पर्चा भरने जा रहे हैं। बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी 25 मई को वाराणसी के सुप्रसिद्ध गंगाघाट पर आरती की। प्रधानमंत्री मोदी धर्म में अपनी गहरी आस्था और विश्वास रखते हैं। इतना ही नहीं पीएम मोदी व्यक्तिगत जीवन से लेकर राजनीतिक जीवन के प्रायः सभी कार्य शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर करते हैं।

इसके अलावा श्री मोदी मां कालिका के उपासक भी हैं। पीएम मोदी की धर्म में गहरी आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब कभी भी वे गुजरात जाते हैं तो समय निकालकर पावागढ़ के उस कालिका मंदिर में दर्शन के लिए जरूर जाते हैं जिसके वे उपासक हैं। मालूम हो कि हाल ही में उनकी मां ने इन्हें इस देवी माता मंदिर की चुनरी भेंट की थी। आगे हम जानते हैं कि पीएम मोदी ने अपने नामांकन से पहले जिस विश्वप्रसिद्ध गंगा घाट पर आरती की उसका पुराणों में क्या महत्व बताया गया है।

शिव की नागरी काशी के सुप्रसिद्ध गंगाघाट पर जब भी आरती होती है तो ये नजारा बेहद ही यादगार और अद्भुत लगता है। कहते हैं कि इस आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। काशी के दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती साल 1991 में शुरू हुई थी। कहते हैं कि इस आरती की शुरुआत सबसे पहले हरिद्वार में हुई। इसे देखते ही देखते बनारस में भी आरती की शुरुआत की गई। जिसके बाद दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का सिलसिला चल पड़ा जो अबतक जीवंत है। इस गंगा आरती से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं शास्त्रों में वर्णिक हैं। एक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने दशाश्वमेध घाट पर दश अश्वमेघ यज्ञ करवाया था। इसलिए इस घाट का नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा।

पौराणिक कथा के अनुसार दूसरी शताब्दी में प्रसिद्ध भारशिव राजाओं ने कुषाणों को परास्त कर दस अश्वमेध यज्ञ करने के बाद यहीं पर स्नान किया था। कहते हैं कि प्राचीन काल में इसका नाम रूद्र सरोवर था। घाट के सामने गंगा को रूद्र सरोवर तीर्थ माना जाता है। साथ ही ऐसी मान्यता है कि इस तीर्थ में स्नान मात्र से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज यहां पूजन-आरती से पहले भी संकल्प मंत्रोच्चारण में इस जगह के लिये ‘रूद्र सरोवर’ का ही नाम लिया जाता है। वहीं मत्यस्य पुराण के अनुसार काशी के पांच प्रमुख तीर्थों में इस घाट को स्थान प्राप्त है।