Laxmi Jayanti 2020: फाल्गुन पूर्णिमा (Falgun Purnima) का दिन माता लक्ष्मी के जन्म का दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन लक्ष्मी जयंती मनाई जाती है। कहा जाता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी। लक्ष्मी जयंती मुख्य तौर पर दक्षिण भारत में मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से माता लक्ष्मी की अराधना करता है उसके जीवन में सुख सुविधाओं की कभी कमी नहीं रहती। जानिए कैसे मनाते हैं इस खास दिन को…

लक्ष्मी जयंती की पूजा विधि: इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा भगवान विष्णु के साथ की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े धारण करें। फिर एक चौकी लें उस पर गंगाजल डालकर उसे पवित्र कर लें। फिर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले वस्त्र तो माता लक्ष्मी को लाल वस्त्र अर्पित करें। भगवान को फूल चढ़ाएं। माता लक्ष्मी को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर विधिवत पूजा करें। माता लक्ष्मी के जन्म की कथा सुनें। खीर और मिठाई का भोग लगाएं।

मां लक्ष्मी के जन्म की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राक्षसों ने स्वर्ग लोक पर कब्जा कर लिया। जिसके बाद सभी लोग भगवान विष्णु के पास गए तब भगवान विष्णु ने सभी देवताओं को समुद्र मंथन करने के लिए कहा। लेकिन इसके लिए उन्हें राक्षसों की आवश्यकता थी तब नाराद जी राक्षसों के पास गए और उन्हें अमृत का लालच देकर समुद्र मंथन के लिए मना लिया। यह समुद्र मंथन एक कछुए की पीठ और वासुकी नाग के द्वारा किया जा रहा था।

उस समुद्र मंथन से एक-एक करके चौदह रत्न निकले। उन्हीं चौदह रत्नों में से मां एक थीं मां लक्ष्मी। मां लक्ष्मी के एक हाथ में कलश था और दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। समुद्र मंथन से उत्पन्न होने के बाद मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का पति रूप मे वरण कर लिया। जिस दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई थी। वह दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का था। इसी कारण से हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मां लक्ष्मी के जन्मदिवस यानी लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है।