Kumbha Sankranti, Significance, Muhurat: सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश करने पर कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की विशेष रूप से पूजा अर्चना होती है। फाल्गुन मास में आने वाली इस संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन देवी देवता पवित्र नदियों में वास करते हैं। इसलिए स्नान दान के लिए ये तिथि विशेष महत्व रखती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधि विधान से सूर्य भगवान की पूजा करने से घर परिवार के किसी भी सदस्य पर कोई मुसीबत नहीं आती।
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कुंभ संक्रांति मुहूर्त: इस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन दोपहर 3 बजकर 18 मिनट पर होगा। कुम्भ संक्रान्ति का पुण्य काल 09:22 ए एम से 03:18 पी एम तक रहेगा जिसकी कुल अवधि 05 घण्टे 56 मिनट्स की होगी। कुम्भ संक्रान्ति महा पुण्य काल 01:27 पी एम से 03:18 पी एम तक रहेगा। जिसकी अवधि 01 घण्टा 51 मिनट्स की है।
कुंभ संक्रांति पर क्या करें?
– सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं इसके बाद सभी दैनिक कार्यों को पूरा करके स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
– सूर्य भगवान को जल अर्पित करते समय आदित्य ह्रदय स्रोत का पाठ करें। मान्यता है कि इसके पाठ से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है।
– इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। क्योंकि इस तिथि पर देवताओं का पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, शिप्रा इत्यादि में वास होता है।
– कुंभ संक्रांति के दिन खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों को ब्राह्मणों को दान करना चाहिए। इस दिन दान करने का कई गुना फल प्राप्त होता है।
साल में होती हैं 12 संक्रांति: ज्योतिष अनुसार सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करने को संक्रांति कहा जाता है। इस तरह से एक साल में कुल 12 संक्रांति आती हैं। जिसमें से 4 संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। वो हैं मेष संक्रांति, तुला, कर्क और मकर संक्रांति। लेकिन प्रत्येक संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है। संक्रांति के दिन विधि विधान से सूर्य देव की उपासना करने से समस्त प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। साथ ही मान-सम्मान में वृद्धि भी होती है।

