भगवान शिव भक्तों की भक्ति से बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए उन्हें लोग भोलेबाबा कहते हैं। परंतु हमेशा शांत-स्वरूप में रहने वाले भोलेबाबा को जब गुस्सा आता है तो धरती डोलने लगती है। इसलिए ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव जी को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के लिए शिवलिंग पर वैसी चीजें चढ़ानी चाहिए जो उन्हें पसंद है। साथ ही कुछ चीजें ऐसी हैं जिसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार 7 चीजें ऐसी हैं जिसे शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। आगे जानते हैं कि शिवलिंग पर कौन-कौन से 7 चीज नहीं चढ़ाना चाहिए।
शंख का जल: शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित करना निषेध माना गया है। क्योंकि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान का भक्त था। इसलिए शंख से विष्णु जी की पूजा बहुत अच्छी मानी जाती है न की शिव जी पूजा।
तुलसी का पत्ता: शिवलिंग पर तुलसी के पत्तों को चढ़ाना भी निषेध माना गया है। कहते हैं कि जलंधर नामक असुर की पत्नी बृंदा की आंसुओं से तुलसी की उत्पत्ति हुई। जिसे भगवान विष्णु की पत्नी के रूप में स्वीकार किया है। इसलिए शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
तिल: कहते हैं कि भगवान विष्णु जी के मैल से उत्पन्न हुआ है। इसलिए इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता है।
खंडित चावल: इसे शिवलिंग पर कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। चावल अक्षत होता है इसलिए इसके टूटे हुए भाग को अशुद्ध माना जाता है। यही कारण है कि शिवलिंग पर टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए।
कुमकुम: इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं। इसलिए शिवलिंग पर कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए।
हल्दी: इसे भी शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। क्योंकि हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के साथ माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाया जाता है।
नारियल: इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिसका संबंध भगवान विष्णु जी के साथ है। इसलिए शिवलिंग के ऊपर चाहकर भी नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए।

