हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है। तुलसी को शास्त्रों में न केवल पूजनीय माना गया है बल्कि ये कई बीमारियों में भी रामबाण का काम करती है। तुलसी जी के पत्तों में खास औषधीय गुण भी विधमान हैं। इसलिए पूजा के अलावा इसके पत्तों को दवाई के रूप में तोड़ा जाता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि तुलसी के पत्ते तोड़ने के नियम क्या हैं? साथ ही तुलसी के पत्ते तोड़ते वक्त क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? यदि नहीं, तो आगे इसे जानते हैं।
दरअसल हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी को देवी लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। साथ ही इससे कई बड़ी-बड़ी आध्यात्मिक बातें भी जुड़ी हैं। कहते हैं कि इसके बिना भगवान विष्णु की पूजा में प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता है। इसके अलावा हिन्दू में देव पूजा और श्राद्ध कर्म में तुलसी बहुत ही आवश्यक मानी गई है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण के भोग में और सत्यनारायण भगवान की कथा के प्रसाद में तुलसी की पत्तियां अवश्य होनी चाहिए।
सावधानियां
- शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
- तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोड़ना चाहिए, नाखूनों के तोड़ने से पाप लगता है।
- शाम के बाद तुलसी जी को छूना वर्जित है। इसलिए इससे बचना चाहिए।
- यदि शाम के समय तुलसी के पत्ते तोड़ना आवश्यक हो तो पहले पौधे को हिलाना चाहिए।
- अमावस्या, चतुर्दशी और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
- सायंकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है। इसलिए सूर्यास्त के बाद तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़ी जाती हैं।
- तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का अवतार मानी गई हैं। इसलिए प्रसाद स्वरूप मिले तुलसी-पत्ते को चबाकर नहीं खाना चाहिए।
- भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध किया था जिस कारण कभी भी शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
- यदि तुलसी का पौधा सूख जाता है तो उसे किसी पवित्र नदी, तालाब या कुएं में प्रवाहित कर देना चाहिए। तुलसी का मुरझाया पौधा रखना अशुभ माना जाता है।

