हिन्दू धर्म में लोग पूजा-पाठ करना अच्छा मानते हैं। यूं तो सबसे अच्छी पूजा वही मानी गई है जो मन से की गई हो, लेकिन इस भागदौड़ वाली जिंदगी में कुछ लोग जो पूजा-पाठ में अपनी आस्था रखते हैं, वे इसके लिए समय निकाल लेते हैं। वे अपने दिन की शुरुआत पूजा-पाठ से ही करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो ऑफिस जाने की जल्दी में पूजा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वे ऑफिस से आने के बाद यानि शाम में पूजा-पाठ करते हैं। क्या आप जानते हैं कि शाम के समय पूजा करना क्यों जरूरी है? यदि नहीं! तो इसे कथा वाचक जया किशोरी के प्रवचन से जानते हैं।
प्रवचनकर्ता जया किशोरी अपने प्रवचन में कहतीं हैं कि शाम का समय पूजा-पाठ के लिए होता है। प्रवचन के माध्यम से ये कहती हैं कि हर काम के लिए मनुष्य को एक समय दिया गया है। शाम का समय पूजा-पाठ के क्यों खास है इसके बारे में उन्होंने बताया कि इसके पीछे दो कारण हैं। पहला कारण उन्होंने बताया कि शाम के समय को गोधूलि बेला कहते हैं।
प्रवचन में आगे जया किशोरी जी ने कहा कि जब श्रीकृष्ण गाय चराकर घर वापस लौट रहे होते हैं तो गायों के पैर से जो धूल उड़ती है, वह गोधूलि है और इस समय को गोधूलि काल कहते हैं। अपने प्रवचन में आगे उन्होंने कहा- दूसरा कारण ये है कि इसी समय पर भगवान शिव और पार्वती पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। इसलिए माना जाता है कि इस समय पूजा पाठ करना चाहिए ताकि वो हमारे घर भी आएं।

