पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश ने कई अवतार लिए हैं। जब भी पृथ्वी पर आसुरी शक्तियों का प्रकोप बढ़ा गणेश भगवान ने उस संकट से निकालने के लिए अवतार लिए हैं। गणेश पुराण, मुद्गल पुराण और गणेश अंक में भगवान गणेश के अवतारों का वर्णन मिलता है। इसके अलावा कई ग्रंथो में भी गणेश के अवतारों के बारे में बताया गया है। उनके 14 नाम बताए जाते हैं, जो इस प्रकार हैं इनमें विनायक, गजानन, गणेश, लंबोदर, एकदंत, वक्रतुंड, विघ्नराज, भालचंद्र, गणधिप, हेरंब, कृष्णपिंगाक्ष, आखुरघ, गौरीसुत और विकट। आज हम आपको भगवान गणेश के विकट अवतार के बारे में बता रहे हैं। बताया जाता है कि यह अवतार उन्होंने कामासुर के अहंकार को अहंकार को खत्म करने के लिया था।
प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार, कामा आसुर भगवान विष्णु का अंश था। जब विष्णु जलन्धर के वध के लिए वृंदा का तप नष्ट करने पहुंचे तो उनके शुक्र से एक अत्यंत तेजस्वी असुर पैदा हुआ। कामाग्नि से पैदा होने के कारण उसका नाम कामासुर हुआ। कामासुर ने बाद में दैत्यगुरु शुक्राचार्य से शिक्षा प्राप्त की और ब्रह्माण्ड पर विजय करने का मन बनाया। गुरु शुक्राचार्य ने शिष्य से खुश होकर विजय पाने के लिए शिव को प्रसन्न करने के लिए कड़ी तपस्या करने का सुझाव दिया।
तब कामासुर ने भगवान् शिव के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते हुए कठोर तपस्या की, जिससे अन्न, जल त्याग के कारण उसका शरीर जीर्ण शीर्ण हो गया। उसकी इस तपस्या से खुश होकर शिव जी ने प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। उसने कामना की कि वह ब्रह्माण्ड का स्वामी, शिवभक्ति और मृत्युन्जयी होने का वरदान प्रदान किया जाए। वरदान मिलने के बाद अहंकार में चूर कामासुर ने पृथ्वी के समस्त राजाओं को पराजित कर, स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिया। तब महर्षि मुद्गल के मार्ग दर्शन में सभी देवी, देवता और ऋषि-मुनि ने कामासुर से छुटकारा पाने के लिए श्री गणेश की उपासना की। इस तरह गणेश ने उपासना से प्रसन्न होकर विकट अवतार लिया।
मयूर पर सवार विकट ने सभी देवी देवताओं के साथ मिलकर कामासुर की राजधानी को घेर लिया और युद्ध किया। इस घमासान युद्ध में कामासुर के दोनों पुत्र मारे गए। कामासुर भी जान गया कि उसका अंत नजदीक है। विकट के गुस्से से बचने के लिए उसने माफी मांगी और अपने अस्त्र-शस्त्र त्याग उनकी शरण में आ गया।
