भैरव के रुप को बहुत ही डरावना माना जाता है। भैरव बाबा को तांत्रिक विद्याओं में अधिक प्रसिद्ध माना जाता है, लेकिन इसी के साथ ये भी कहा जाता है कि किसी को बुरे स्वपन्न, बुरी नजर या किसी के द्वारा किया कोई टोटका हो तो भैरव बाबा ही उसकी मदद करते हैं। भैरव बाबा को बटुक भैरव, काल भैरव, अष्ट भैरव, श्मशान भैरव आदि अनेक नामों से जाना जाता है। भैरव को भगवान शिव का रुप माना जाता है। माना जाता है कि मध्याह्र के समय शिवजी भैरव रुप में उत्पन्न हुए थे। भैरव को तामसिक माना जाता है जो ठीक नहीं है, इन्हें सिर्फ शराब से जोड़ना भी उचित नहीं है। कालभैरव के साथ में कुत्ते का भी पूजन किया जाता है।
कालभैरव के पूजन से केतु ग्रह ठीक किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में केतु ठीक नहीं होता है उन्हें शक, वहम और बुरे सपने आने लगते हैं। व्यक्ति को दिमागी बीमारी हो सकती है। बुरे सपने आते हैं तो कालभैरव का पूजन करना शुभ माना जाता है। इसी के साथ माना जाता है कि जो लोग अधिक कर्जों में डूबे हुए हैं उन्हें कालभैरव का पूजन करने से राहत मिल सकती है। ऑफिस या करियर में समस्याएं हैं तो उसे भी कालभैरव समाप्त करते हैं।
ऊं नमो भगवनते बटुक भैरवाय।
देवी पुत्राय सर्व दुष्टजन मुकस्तंभन्।।
कुरु-कुरु ऊं ह्रां ह्रीं हुं।
ठ ठ ठ हुं फट् स्वाहा।।
इस मंत्र के जाप से कोई भी व्यक्ति जो आपसे ईर्ष्या करता है, उसका मन बदलने लगेगा और उसकी ईर्ष्या भावना शांत हो जाएगी। कर्ज से निकलने के लिए कालभैरव की विशेष उपासना की जाती है। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए हर बुधवार के दिन गरीबों में एक वर्ष तक जलेबी बांटनी चाहिए। अचानक बढ़ते संकटों से बचने के लिए शनिवार के दिन नारियल से भैरव की अराधना करनी चाहिए। अपने तकिए के पास भैरव पूजा में इस्तेमाल नारियल अपने सिर के पास रखने से मन का डर खत्म हो सकता है।


