Kharmas 2025: हिंदू धर्म में साल में दो बार खरमास आता है। यह तब होता है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार 14 मार्च 2025 से खरमास शुरू हुआ है और इसका समापन 13 अप्रैल 2025 को होगा। हिंदू धर्म में खरमास को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार आदि जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। दरअसल ज्योतिष के अनुसार, सूर्य को ग्रहों का राजा और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। जब सूर्य धनु या मीन राशि में होते हैं तो उनका प्रभाव कमजोर हो जाता है। हिंदू मान्यता के मुताबिक, किसी भी मांगलिक काम के लिए सूर्य का तेज और शक्ति बहुत जरूरी होती है। जब सूर्य कमजोर होते हैं, तो शादी-विवाह या अन्य शुभ काम करने से अच्छे परिणाम नहीं मिलते। इसलिए इस समय कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अगर आप सूर्य देव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दौरान आपको श्री सूर्य चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि इससे सूर्य देव की कृपा बनी रहती है। यहां पढ़ें पूरी सूर्य चालीसा।

श्री सूर्य चालीसा

दोहा

कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।

पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।

चौपाई

जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।

विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।

सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।

मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।

मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,

आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।

चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।

सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।

उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।

अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।

भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।

युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।

जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।

सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।

दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।

परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।

भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।

दोहा

भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

खरमास का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में पूजा-पाठ और भक्ति करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस समय लोग तीर्थ यात्रा पर जाते हैं और गंगा स्नान करते हैं। जो लोग इस दौरान नियम से भजन-कीर्तन और दान करते हैं, उन्हें भविष्य में अच्छे फल मिलते हैं। इसके अलावा दान-पुण्य भी इस समय बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पापों का नाश होता है और अच्छे फल मिलते हैं। साथ ही, गौ सेवा करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

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