कामदा सप्तमी व्रत को शास्त्रों में कामना पूर्ति के लिए खास माना गया है। साल 2019 में कामदा सप्तमी व्रत 13 मार्च, बुधवार को मनाया जा रहा है। कामनाओ को प्रदान करने वाला यह व्रत साल भर चलने वाला व्रत होता है। प्रत्येक शुक्ल सप्तमी को व्रत करते हैं और हर चौमासे में पारण करके साल भर इस व्रत को करके इस सम्पन्नता पूर्ण होती है और सभी प्रकार के पाप नाश होते हैं। साथ ही स्वास्थ्य, धन, संतान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। ब्रह्मा जी ने विष्णु जी को इस व्रत की महिमा सुनाकर इस व्रत के महत्त्व को बढ़ाया। आगे जानते हैं कामदा सप्तमी की व्रत विधि और ज्योतिषीय महत्व।

व्रत विधि: षष्ठी को एक समय भोजन करके सप्तमी को निराहार रहकर, “खरखोल्काय नमः” मन्त्र से सूर्य भगवान की पूजा की जाती है और अष्टमी को तुलसी दल के समान अर्क (आक ) के पत्तो को खाया जाता है। प्रातः स्नानादि के बाद सूर्य भगवान की पूजा की जाती है सारा दिन “सूर्याय नमः” मन्त्र से भगवान का स्मरण किया जाता है। अष्टमी को स्नान करके सूर्य देव का हवन पूजन किया जाता है। सूर्य भगवान् का पूजन करके आज घी, गुड़ इत्यादि का दान किया जाता है और दूसरे दिन ब्राह्मणों का पूजन करके खीर खिलाने का विधान है।

ज्योतिषीय पक्ष: जिन जातको सूर्य के अच्छे फल प्राप्त नहीं हो रहे या जिनकी सूर्य की दशा चल रही है या सूर्य नीच राशि का है। उनके लिए यह व्रत आरम्भ करना अत्यंत लाभकारी होगा और सूर्य से मिलने वाले सभी फल सकारात्मक रूप से प्राप्त होंगे।