Kalashtami 2019: कालाष्टमी का व्रत हर महीने की अष्टमी तिथि को की जाती है। परंतु वैशाख मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को शास्त्रों में विशेष महत्व दिया गया है। इस बार यह 26 अप्रैल 2019 यानि आज मनाया जा रहा है। कालाष्टमी पर शिव स्वरूप काल भैरव की पूजा की जाती है। कहते हैं कि वैशाख मास की कालाष्टमी का विशेष फलदायी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कालाष्टमी पर भैरव रूप में कुत्ते की पूजा क्यों की जाती है? और इसके पीछे का धार्मिक कारण क्या है? यदि नहीं! तो आगे इसे जानते हैं।
शास्त्रों में काल भैरव का स्वरूप विकराल और क्रोधी बताया गया है। भैरव के एक हाथ में एक छड़ी होती है और उनका वाहन कुत्ता है। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन करवाने का खास महत्व बताया गया है। कहते हैं कि जो भक्त पूरे विधि-विधान से भैरव की पूजा करते हैं उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में आ रही नकारात्मक शक्तियों की बाधा दूर होती है। शास्त्रों में काल भैरव की पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजे से लेकर सुबह 3 बजे तक का होता है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि इनकी पूजा से किसी भी टोने-टोटके का असर नहीं होता है। शास्त्रों में काल भैरव से संबंधित एक कथा आई है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच उनकी श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इस विवाद को सुलझाने के लिए सभी देवी-देवताओं की सभा बुलाई गई। देवी-देवताओं के विचार-विमर्श के बाद जो निष्कर्ष निकला उससे विष्णु और शिव तो सहमत हो गए लेकिन ब्रह्मा जी खुश नहीं हुए। जिसके बाद उन्होंने शिव को अपमानित करने की भी कोशिश की जिससे भगवान शिव बहुत क्रोधित हो गए। कहते हैं कि भगवान शिव के इस भयंकर रूप से काल भैरव की उत्पत्ति हुई। जिसे देखकर सभी देवी-देवता डर गए।
कालभैरव जो कि काले कुत्ते पर सवार होकर हाथों में छड़ी लिए प्रकट हुए थे, उन्होंने ब्रह्मा जी के सिर को धर से अलग कर दिया। अब ब्रह्मा जी के पास केवल चार सिर ही बचे। उन्होंने क्षमा मांगकर काल भैरव के कोप से खुद को बचाया। ब्रह्मा जी के माफी मांगने पर भगवान शिव फिर से अपने रूप में आ गए लेकिन काल भैरव पर ब्रह्म हत्या का दोष चढ़ चुका था। जिससे छुटकारा पाने के लिए वे कई वर्षों तक भटकते हुए वाराणसी में पंहुचे, जहां उन्हें इस पाप से मुक्ति मिली। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि काल भैरव की पूजा से ब्रह्म हत्या के पाप से भी छुटकारा मिल जाता है।

