Kalashtami 2019: साल 2019 में कालाष्टमी 26 अप्रैल, शुक्रवार को यानि आज मनाई जा रही है। कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा की जाती है। भैरव को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। कहते हैं कि कालाष्टमी के दिन ही शिव शंकर के इस रूप का जन्‍म हुआ था। काल का अर्थ है काल। भैरव का अर्थ है शिव। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन जो भी व्यक्ति कालभैरव की पूजा करता है वो नकारात्मक शक्तियों से दूर रहता है। शास्‍त्रों के मुताबिक कालाष्टमी के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। धर्म शास्त्र के जानकारों का मानना है कि यह पूजा विधि-विधान से रात में की जाती है। आगे हम जानते हैं कि कालाष्टमी पर किस प्रकार भैरव की पूजा करनी चाहिए और इसकी विधि क्या है?

कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के स्‍वरूप काल भैरव की पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इसलिए इस दिन शिव के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो लें। संभव हो तो गंगा जल से शुद्धि करें। इसके बाद व्रत का संकल्‍प लें। फिर पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें। पूजन के बाद ‘ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद काल भैरव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा आधी रात में करना शुभकारक है। इसलिए मध्य रात्रि में धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करें। व्रत पूरा होने के बाद काले कुत्ते को मीठी रोटियां खिलाएं। साथ ही काल भैरव से अपने और पविवार के कल्याण की कामना करें।


काल भैरव मंत्र

‘ऊं भ्रं कालभैरवाय फट’

काल भैरव आरती
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।जय।।
तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक, भीषण वपु धारक।।जय।।
वाहन शवन विराजत कर त्रिशूलधारी।
महिमा अमिट तुम्हारी, जय जय भयकारी।।जय।।
तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।।जय।।
तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।।जय।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।।जय।।
श्री बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावें।
कहें धरणीधर नर मनोवांछित फल पावें।।जय।।