भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करवाचौथ जैसा व्रत रखती हैं। इस व्रत को कहते हैं कजरी तीज। 18 अगस्त को होने वाले कजरी तीज को लेकर मान्यता है कि इस दिन महिलाओं के व्रत से प्रसन्न होकर भगवान शिव और पार्वती सुखी दाम्पत्य जीवन का वरदान देते हैं। मान्यता है कि जिन लड़कियों की शादी में बाधा आ रही हो उन्हें भी ये व्रत रखना चाहिए इससे आपकी आगे की राह भोलेनाथ प्रशस्त कर देंगे। आइए जानते हैं इस व्रत को रखने वाली महिलाओं और कुंवारियों को किस कजरी तीज व्रत कथा को पढ़ना चाहिए।

ये कजरी तीज व्रत कथा
कजरी तीज व्रत कथा के अनुसार एक गांव में गरीब ब्राह्मण का वास था। उसकी हालत दयनीय थी कि वह दो वक्त का भोजन कर पाता था। ऐसे में एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखने का संकल्प लिया और अपने पति से व्रत के लिए चने का सत्तू लाने को कहा। यह बात सुनकर ब्राह्मण परेशान हो गया कि आखिर उसके पास इतने पैसे तो है नहीं, फिर वह सत्तू कहां से लेकर आए।

बहरहाल, ब्राह्मण साहुकार की दुकान पर पहुंचा। वहां उसने देखा कि साहुकार सो रहा था। ऐसे में ब्राह्मण चुपके से दुकान में चला गया सत्तू लाने लगा। इतने में साहुकार की नींद खुल गई और उसने ब्राह्मण को देख लिया। उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया और चोर-चोर चिल्लाने लगा। ब्राह्मण ने तब कहा कि वह चोर नहीं है और केवल सवा किलो सत्तू लेकर जा रहा है।

ब्राह्मण ने बताया कि उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत किया है और उसके लिए पूजा सामग्री चाहिए। इसलिए उसने केवल सत्तू लिया है। यह सुनकर साहुकार ने ब्राह्मण की तालाशी ली तो उसके पास सही में कुछ नहीं मिला। साहुकार की आंखें नम हो गई। उसने ब्राह्मण से कहा कि अब से उसकी पत्नी को वह बहन मानेगा। इसके बाद साहुकार ने ब्राह्मण को पैसे और सामान देकर विदा किया। कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और पति की आयु लंबी होती है।