जिद्दी व्यक्ति कई बार अपनी किस्मत को खुद बिगाड़ लेता है। जिद्द दो तरह की होती है, जिसमें से सकारात्मक जिद्द व्यक्ति को कामयाबी हासिल करने में मदद दिलाती है। वहीं दूसरी तरफ अंहकार में आकर छोटी-छोटी चीजों के लिए जिद्द करना नकारात्मक होती है जो किसी भी तरह से लाभकारी नहीं मानी जाती है। घर के बड़े लोग तो फिर भी अपनी स्थितियों को समझ लेते हैं लेकिन इस नकारात्मक जिद्द के अधिकतर शिकार बच्चे होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि मंगल और राहु के खराब होने के कारण बच्चा नकारात्मक जिद्द करने लगता है। इसी के साथ माना जाता है कि जिन लोगों का मंगल खराब होता है उनका 28 से 48 साल तक का समय अच्छा नहीं माना जाता है और राहु के खराब होने से 36 से 52 साल की उम्र तक समय खराब रहता है।
मंगल और राहु के खराब होने के कारण बच्चा जिद्द करने लगता है इसे सुधारने के लिए चांदी व्यक्ति के मन को शांत रखती है। चांदी धारण करना, चांदी के गिलास में पानी पीने से मन शांत रहता है। बच्चों की जिद्द को रोकने के लिए उनके दूध के गिलास में अश्वगंधा मिलाकर देना लाभकारी माना जाता है। इसी के साथ स्लेटी या ग्रे रंग के धागे में अश्वगंधा की जड़ बांधकर बृहस्पतिवार या शनिवार के दिन बच्चे को धारण करवाना लाभकारी माना जाता है। जिद्द में बच्चे क्रोधित होने लगते हैं, इस क्रोध का कारण ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मंगल, शनि, राहु खराब माने जाते हैं। ऐसे बच्चों के लिए शनिवार के दिन दूध से जौं को चम्मच में लेकर धोने के बाद बहते हुए पानी में बहा देना लाभकारी माना जाता है। इस उपाय को सूर्यास्त के 48 मिनट बाद ही किया जाता है।
बच्चों की जिद्द कम करने के लिए किश्मिश, अंगूर, मुनक्का खिलाना लाभकारी मान जाता है। गैस, पित्त बढ़ाने वाला भोजन कभी भी जिद्दी बच्चों को नहीं देना चाहिए। मसालेदार भोजन से बच्चों को दूर रखना ही अच्छा माना जाता है। विटामिन-सी देने वाले फल बच्चे को खिलाएं, इससे धीरे-धीरे बच्चे की जिद्द कम होने लगेगी। नमक और चीनी का कम सेवन भी जिद्दी स्वभाव को कम करता है। शारीरिक रुप से कमजोर लोगों में भी जिद्द आने लगती है और काम में सफलता ना मिलने के कारण भी व्यक्ति का जिद्दी स्वभाव बनने लगता है। इसके लिए सफेद चंदन और हल्दी का तिलक लगाना लाभकारी माना जाता है।
