Hariyali Amavasya 2025: शास्त्रों में श्रावण महीने का विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस महीने पड़ने वाली हर एक तिथि काफी खास होती है। इस महीने में महीने की शिवरात्रि, प्रदोष प्रत, मंगला गौरी व्रत और हरिलायी तीज और हरियाली अमावस्या पड़ती हैं। यहां हम बात करने जा रहे हैं हरियाली अमावस्या के बारे में इस दिन स्नान-दान के साथ पितरों का तर्पण, पिंडदान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन पेड़-पौधे लगाने का विशेष महत्व है। इस साल हरियाली अमावस्या 24 जुलाई को मनायी जाएगी। वहीं इस दिन कई महत्वपूर्ण योग भी बन रहे हैं। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व…
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हरियाली अमावस्या तिथि (Hariyali amavasya 2025 Tithi)
ज्योतिष पंचांग के मुताबिक सावन अमावस्या का आरंभ 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 29 मिनट से होगी। वहीं, 25 जुलाई को देर रात 12 बजकर 41 मिनट पर अमावस्या तिथि का अंत होगा। इसलिए उदयातिथि को आधार मानते हुए 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी।
हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त और योग (Hariyali amavasya 2025 Shubh Yoga)
सावन अमावस्या पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि और शिववास योग का संयोग बन रहा है। रवि पुष्य योग का दिन भर है। वहीं, हर्षण योग का शुभ संयोग सुबह 09 बजकर 52 मिनट तक है। अमृत सिद्धि योग का योग दिन भर है। इसके साथ ही पुनर्वसु नक्षत्र शाम 04 बजकर 2 मिनट तक है। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में भोलेनाथ की पूजा का दोगुना फल प्राप्त होता है।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 39 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 16 मिनट पर
- चंद्रास्त- शाम 07 बजकर 15 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 14 मिनट से 04 बजकर 58 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 45 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 17 मिनट से 07 बजकर 37 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक
हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। मान्यता है इस दिन तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। साथ ही सुख- समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। हरियाली अमावस्या भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा करने से सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
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