Maha Kumbh Mela 2021: हरिद्वार में अगले साल आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले के शाही स्नान की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के संतों के साथ करीब दो घंटे की बैठक के बाद इन तिथियों की घोषणा की गई है। जिसके अनुसार पहला शाही स्नान 11 मार्च को यानी महाशिवरात्रि के दिन होगा, दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल, तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल और चौथा शाही स्नान 27 अप्रैल को होगा।
इस अहम बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के अलावा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, महामंत्री हरिगिरि, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी शामिल थे। इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे कुंभ से जुड़े सभी कार्यों को निश्चित समय एवं गुणवत्ता के साथ पूरा कराएं। इस दौरान जिन विभागों को कोई भी समस्या हो, उसे मेलाधिकारी को बताएं। यदि स्वीकृति शासन स्तर से की जानी हो तो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।
कुंभ मेला हर 12 साल के अंतराल में हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम में आयोजित किया जाता है। ज्योतिष अनुसार जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब इस मेले का आयोजन किया जाता है।
कुंभ की कथा: कुभ मेले की पौराणिक कथा समुद्र मंथन के समय से जुड़ी हुई है। जिसके अनुसार देवताओं और राक्षसों ने समुद्र के मंथन तथा उसके द्वारा प्रकट होने वाले सभी रत्नों को आपस में बांटने का निर्णय लिया था। इस मंथन में सबसे मूल्यवान रत्न निकला अमृत, जिसे पाने के लिए देवताओं और दानवों में 12 दिनों तक युद्ध हुआ। देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के 12 वर्षों के समान हैं। असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अमृत पात्र को अपने वाहन गरुड़ को दे दिया।
असुरों ने जब उस पात्र को छीनने की कोशिश की तो उससे अमृत की कुछ बूंडे इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिरीं। तभी से हर 12 वर्ष के अंतराल में इन स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। दैत्यों और देवों का युद्ध 12 दिनों तक, 12 स्थानों पर चला और इन 12 स्थलों पर इस कुंभ यानी कलश से अमृत छिलका जिनमें से चार स्थल मृत्युलोक यानी धरती पर हैं तो वहीं 8 स्थान स्वर्ग में माने जाते हैं।
