Happy Makar Sankranti 2020: मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है। बस इसके नाम और मनाने के तरीके में थोड़ा अंतर रहता है। उत्तर भारत के लोग इसे खिचड़ी (Khichdi 2020) के नाम से जानते हैं तो वहीं तमिल के लोग इसे पोंगल पर्व (Pongal 2020) के नाम से। असम में इस दिन बिहू (Bihu 2020) पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान (Snan Date) करने की परंपरा है इसी के साथ इस दिन कई जगह पतंग भी उड़ाई जाती है। जिस कारण इसे पतंग पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को कई लोग अपने घर की छतों पर पतंग उड़ाकर सेलिब्रेट करते हैं। जानिए मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने के क्या हैं कारण…

भगवान राम द्वारा शुरू हुई थी ये परंपरा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की शुरुआत की थी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने अपने भाइयों और श्री हनुमान के साथ पतंग उड़ाई थी, इसलिए तब से यह परंपरा पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई। तमिल की तन्दाना रामायण के मुताबिक भगवान राम ने जो पतंग उड़ाई वह इन्द्रलोक में चली गई थी।

शुभता की होती है शुरुआत: माना जाता है कि सूर्य के मकर राशि में जाते ही शुभ समय की शुरुआत हो जाती है। इसलिए लोग शुभता की शुरुआत का जश्न मनाने के लिए पतंग उड़ाते हैं। इस दिन आसमान में रंग बिरंगी पतंगे लहराती हुई नजर आती हैं। कई जगहों पर पतंग उड़ाने की प्रतियोगताएं भी आयोजित की जाती है।

शरीर के लिए है फायदेमंद: इस दिन पतंग उड़ाना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि सर्दियों में खासी, जुकाम और अन्य तरह के रोग शरीर को काफी प्रभावित करते हैं। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने के चलते उनसे निकलने वाली किरणें मानव शरीर के लिए औषधि का काम करती है। इसलिए पतंग उड़ाने के बहाने सूर्य की रोशनी में कुछ समय बिताया जाता है। जिससे शरीर स्वस्थ रहे।

मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Puja Muhurat):

मकर संक्रांति 2020- 15 जनवरी
संक्रांति काल- 07:19 बजे (15 जनवरी)
पुण्यकाल-07:19 से 12:31 बजे तक
महापुण्य काल- 07:19 से 09: 03 बजे तक
संक्रांति स्नान- प्रात: काल, 15 जनवरी 2020