हिंदू धर्म में हलछठ त्योहार का विशेष महत्व है। हलछठ को हलषष्ठी, ललई छठ भी कहा जाता है। इस साल हलषष्ठी का त्योहार बुधवार, 18 अगस्त को मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान श्री कृष्ण के भाई दाऊ की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को बलराम जयंती भी कहा जाता है।  इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु और उनकी धन-समृद्धि के लिए यह उपवास करती हैं मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से मिला पुण्य संतान को संकटों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजन विधि…

हलषष्ठी शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि बुधवार, 17 अगस्त को शाम 06 बजकर 51 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 18 अगस्त को रात 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय तिथि के आधार पर हल षष्ठी 18 अगस्त को मनाई जाएगी।

जानिए पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान करें। साथ ही साफ सुतरे कपड़े पहनें। इसके बाद एक पीला कपड़ा चौकी पर बिछाएं और श्री कृष्ण और बलराम जी की फोटो या प्रतिमा चौकी पर रखें। इसके बाद बलराम जी की प्रतिमा पर चंदन का तिलक करें। फिर फूल चढ़ाएं। बलराम जी का ध्यान करके उन्हें प्रणाम करें और भगवान विष्णु की आरती के साथ पूजा संपन्न करें। हलषष्ठी पर श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के शस्त्र की पूजा का भी विधान है, इसलिए एक प्रतीकात्मक हल बनाकर उसकी पूजा करें।

हलछठ व्रत नियम

हलछठ को लेकर शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं। जिसमें से हलछठ व्रत में गाय का दूध या दही के इस्तेमाल करने की मनाही होती है। इस दिन केवल भैंस के दूध या दही का सेवन किया जाता है। इसके अलावा हल से जोता हुआ कोई अन्न या फल का भी सेवन नहीं किया जाता है।

जानिए क्या है महत्व 

मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान को लंबी आयु और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। पुत्र प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है। इसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में हलछठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन का महत्व बहुत अधिक है। ब्रजवासी इस दिन दाऊ जी का जन्मोत्सव मनाते हैं। साथ ही इस दिन मेला भी लगता है।