वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह समय-समय एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है। साथ ही दूसरे ग्रह के साथ युति बनाता है। वहीं ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का वर्णन मिलता है जिसमें पुष्य नक्षत्र सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है इस नक्षत्र में जो भी नया काम का शुरू किया जाता है। वह काम सफल रहता है। साथ ही खरीदारी के लिए यह नक्षत्र शुभ माना जाता है।
वहीं जब भी पुष्य नक्षत्र रविवार या गुरुवार को आता है तो यह बेहद ही शुभ होता है। इस बार 28 जुलाई गुरुवार को पुष्य नक्षत्र बन रहा है। जो 29 तारीख में भी कुछ समय तक रहेगा।
गुरु-पुष्य नक्षत्र कब से कब तक
वैदिक पंचांग के मुताबिक पुष्य नक्षत्र 28 जुलाई को सुबह 7 बजकर 4 मिनट से आरंभ हो रहा है जो कि 29 जुलाई को सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही गुरु भी 29 जुलाई को वक्री हो रहे हैं। पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ता है, तो गुरु पुष्य नक्षत्र बनता है। वैदिक ज्योतिष में इस दिन का विशेष महत्व होता है।
शुरू कर सकते हैं नया काम और खरीदारी
वैदिक ज्योतिष में गुरु पुष्य धन समृद्धि के लिए बेहद शुभ योग माना जाता है। इस दिन अगर आप सोना, मकार , वाहन खरीदना चाहते हैं तो यह शुभ रहेगा। इसके साथ ही अगर इस दिन कुछ नया व्याापार शुरू करना चाहते हैं तो व्यापार बहुत अच्छा चलता है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान की पूजा और उपासना करने से व्यक्ति को जीवन के हर फील्ड में सक्सेस प्राप्त होती है। इस दिन सुबह और शाम दोनों समय मां लक्ष्मी का सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपको सुख- समृद्धि की प्राप्ति होगी।
विवाह करने की है मनाही
गुरु पुष्य नक्षत्र के दिन शादी करने की मनाही होती है। क्योंकि ब्रह्मा जी ने किसी कारणवश इस नक्षत्र को श्राप दे दिया था। जिस वजह से विवाह जैसे मंगल कार्य इस दिन करने की मनाही होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार के अनुसार, पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इसलिए इस नक्षत्र का महत्व और भी बढ़ जाता है।
