शास्त्रों में सभी व्रतों में प्रदोष व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस बार भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को गुरु प्रदोष व्रत किया जाएगा। जो 8 सितंबर गुरुवार को मनाया जाएगा। वहीं यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इसलिए इसको गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा- विधि…
जानिए शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत प्रदोष काल में किया जाना शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष व्रत का मुहूर्त शाम 6 बजकर 34 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक है। इस बीच भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
जानिए पूजा- विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और फिर साफ सुथरे कपड़े धारण करें। हो सके तो पीले या सफेद कपड़े पहने। प्रदोष व्रत के दिन सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक भगवान शिव की पूजा का विधान होता है। इसलिए शिव मंदिर में जाकर भोलेनाथ का दूध, दही और मंचामृत से अभिषेक करें। उसके बाद भगवान शिव को पीले या सफेद चंदन से टीका लगाएं। साथ ही भगवान शिव को धतूरा, भांग और बेलपत्र भी अर्पित करें। इसके बाद प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें, आरती करें। फिर भगवान का प्रसाद वितरण करें। इस दिन मां पार्वती का भी ध्यान करें।
ये होनी चाहिए सामग्री
प्रदोष व्रत की पूजा के लिए पुष्प, पंच फल, पंच मेवा, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर और शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री होनी चाहिए।
जानिए गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
गुरु प्रदोष व्रत को रखने से भगवान शिव के साथ- साथ गुरु बृहस्पति का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही जिन लोगों को वैवाहिक जीवन में परेशानी रहती हो। पति- पत्नी के बीच झगड़ा रहता हो वो लोग भी इस व्रत को रख सकते हैं। इस व्रत को रखने से जन्म कुंडली में चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है। जिससे व्यक्ति की मानसिक स्थिति बेहतर होती है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
