ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इंसान के जीवन के जीवन के सभी सुख और दुख उसके अपने कर्म के अलावा गोचर और नक्षत्र के प्रभाव पर निर्भर है। ग्रहों के गोचर में सभी नौ ग्रह विशेष महत्व रखते हैं। सूर्य ग्रह भी इनमें से एक है। ज्योतिष की किताब वृहद पाराशर होरा शास्त्र में लिखा है कि ग्रहण के समय जब सूर्य के साथ राहु या केतु में से कोई एक आता है तब ग्रहण दोष बनता है। परंतु क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन में क्या महत्व है और यह कैसे बनता है? साथ ही ग्रहण दोष का हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है? यदि नहीं, तो आगे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसे जानते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मनुष्य की जन्म कुंडली में कई योग और दोष बनते हैं। इसके प्रभाव से इंसान को जीवन में सफलता और असफलता मिलती है। साथ ही जब कभी सूर्य या चंद्रग्रहण लगता है तो इसके कारण कुंडली में ग्रहण दोष बनता है। ग्रहण दोष एक अशुभ दोष होता है जिसकी वजह से व्यक्ति को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। होरा शास्त्र के मुताबिक जब इंसान की लग्न कुंडली के 12वें भाव में चंद्रमा के साथ राहु या केतु में से कोई एक ग्रह रहता है तब ग्रहण दोष बनता है।
इसके अलावा यदि सूर्य या चंद्रमा के भाव में राहु-केतु में से कोई एक ग्रह स्थित होता है तब भी ग्रहण दोष का निर्माण होता है। ग्रहण दोष के प्रभाव से जीवन में पल-पल पर मुसीबतें आती रहती हैं। साथ ही नौकरी और व्यवसाय में कई प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा आर्थिक परेशानी और फिजूलखर्ची जैसी समस्या भी बनी रहती है।

