Goga Navami 2018 Importance And Puja Vidhi: हिंदू धर्म में गोगा नवमी का खास महत्व बताया गया है। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष नवमी को गोगा नवमी देश के कई हिस्सों में मनाई जाती है। गोगा नवमी को गुग्गा नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह 4 सितंबर, दिन मंगलवार को पड़ रही है। गोगा नवमी को लेकर एक बेहद ही रोचक पौराणिक कथा प्रचलित है। इसके मुताबिक गोगा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है। गोगा जी की पूजा सावन महीने की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन से शुरू होती है। गोगा जी की पूजा कुल नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलती है। इसी वजह से इसे गोगा नवमी भी कहा जाता है।

मालूम हो कि गोगा नवमी के दिन लोग नागों की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से व्यक्ति उनके भय से मुक्त हो जाता है। गोगा जी को सांपों का देवता भी माना गया है। गोगा जी को राजस्थान का लोक देवता भी कहा गया है। इन्हें ‘जहरवीर गोगा जी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गोगा नवमी के पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय समाप्त हो जाता है।

पूजा विधि: गोगा नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर खाना बना लेना चाहिए। इस दिन खीर, चूरमा, गुलगुले आदि बनाए जाते हैं। इसके बाद रोली, चावल से टीका कर बनी हुई रसोई का भोग लगाया जाता है। इसके बाद गोगा जी के घोड़े के आगे दाल रखने का विधान है। और रक्षाबंधन की राखी खोलकर इन्हें चढ़ा दी जाती है। इसके अलावा कई जगह तो गोगा जी की घोड़े पर चढ़ी हुई वीर मूर्ति होती है और कई जगह लोग गोगा जी की मिट्टी की मूर्ति भी बनाते हैं। गोगा जी की पूजा-अर्चना सामुदायिक रूप से भी की जाती है।