गणेश चतुर्थी का पर्व आज पूरे देश में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तमाम हस्तियां और आम लोग सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करके इस पर्व की बधाइयां दे रहे हैं। गणेश उत्सव का यह पर्व आज के दिन से आरंभ होकर कुल दस दिनों तक चलने वाला है। आज दिन गणेश भक्त अपने घरों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि गणेश जी की आराधना करने से सारे कष्टों का नाश होता है।

Ganesh Ji Ki Aarti: यहां पढ़े श्री गणेश जी की आरती लिरिक्स इन हिंदी

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पड़ती है। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। बताते हैं कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को सोमवार के दिन मध्याह्न काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर गणपति की पूजा दोपहर में करना शुभ माना गया है। इस बार गणेश चतुर्थी स्वाति नक्षत्र के साथ गुरुवार को पड़ी है जिसे काफी शुभफलदायक मुहुर्त माना गया है। इस मुहूर्त में गणेश की उपासना से विशेष लाभ प्राप्त होने की मान्यता है। गणेश उत्सव के दौरान लोग अपने घरों पर बड़े ही श्रद्धाभाव से गणेश आरती भी करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए गणेश आरती लेकर आए हैं। इस आरती का पाठ करके आप गणेश उत्सव को खास अंदाज में मना सकते हैं।

गणेश जी की पहली आरती:
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा…
एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा,
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा…

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा…
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा…।

गणेश जी की दूसरी आरती:
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांचीजय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देवरत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरियाजय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति

जय देव जय देवलम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदनाजय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देवशेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद कोजय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता

जय देव जय देवअष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरीजय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देवभावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावेजय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव…।