Mohini Ekadashi 2019 Vrat Vidhi: मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल एकादशी को पड़ती है। वैशाख मास की मोहिनी एकादशी व्रत अन्य एकादशी की तुलना में अधिक पुण्यदायी मानी गई है। साल 2019 में मोहिनी एकादशी 15 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। साथ ही इस एकादशी के निमित्त व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। इसके अलावा मोहिनी एकादशी का पारण (व्रत खोलना) 16 मई 2019 को किया जाएगा। इस सब के बीच आगे जानते हैं कि मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व क्या है? साथ ही इस एकादशी की व्रत-विधि क्या है?
विष्णु पुराण के अनुसार मोहिनी एकादशी का विधिवत व्रत करने से मनुष्य मोह-माया के बंधनों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्रती के समस्त पापों का नाश होता है। मोहिनी एकादशी महत्व मोहिनी एकादशी के विषय में मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद अमृत पाने के लिए दानवों और देवताओं में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। दानवों को अमृत प्राप्त करने की प्रबल स्थिति को देखकर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर दानवों को मोहित कर लिया और उनसे अमृत कलश लेकर देवताओं को सौंप दिया। देवताओं ने इस अमृत का पान कर अजर-अमर हो गए। जिस दिन भगवान विष्णु मोहिनी रूप में प्रकट हुए थे उस दिन वैशाख शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि थी। इसलिए भगवान विष्णु के इसी मोहिनी रूप की पूजा मोहिनी एकादशी के दिन की जाती है।
व्रत-विधि: पुराणों के अनुसार दशमी के दिन संध्या काल में सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। एकादशी का व्रत रखने वाले को अपना मन को शांत और स्थिर रखना चाहिए। एकादशी व्रत के दौरान मन में किसी भी प्रकार का द्वेष भाव मन में नहीं रखना चाहिए। क्रोध और दूसरे की निंदा करने से भी बचना चाहिए। मोहिनी एकादशी पूजा विधि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी, ऋतु फल और तिल का प्रयोग करें। व्रत के दिन अन्न सेवन करना वर्जित है माना गया है। इसलिए व्रत की अवधि में वरती को अन्न ग्रहण से दूर रहना चाहिए।
व्रत में निराहार रहें और शाम में पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। यदि आप किसी कारण व्रत नहीं रखते हैं तो भी एकादशी के दिन चावल का प्रयोग भोजन में नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का फल मिलता है। एकादशी के दिन रात्रि जागरण का अत्यधिक महत्व है। संभव हो तो रात में जगकर भगवान का भजन-कीर्तन करें। एकादशी के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मण भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।

