Amla Or Papmochani Ekadashi 2020 Date, Ekadashi In March: हर महीने में दो एकादशी व्रत आते हैं। एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मार्च में दो बड़ी एकादशी पड़ रही हैं। एक आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) तो दूसरी पापमोचिनी एकादशी। ये दोनों ही एकादशी बेहद ही खास मानी गई है। आमलकी एकादशी में आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है तो पापमोचिनी एकादशी व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होने की मान्यता है। जानिए इन दोनों ही एकादशी की तिथि और महत्व…
आमलकी एकादशी, 06 मार्च: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ये एकादशी महाशिवरात्रि और होली के बीच में आती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस पेड़ के कण कण में भगवान का वास होता है। शास्त्रों अनुसार इस पेड़ को खुद भगवान विष्णु ने जन्म दिया था। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
7 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:40 ए एम से 09:01 ए एम
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 09:28 ए एम
पापमोचिनी एकादशी, 19 मार्च: पापों को नष्ट करने वाली एकादशी को पापमोचिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। जो चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। ये एकादशी होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के मध्य में आती है। पुराणों के अनुसार अगर मनुष्य अपने पापों का पश्चाताप करना चाहता है तो उसे पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
20 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:41 पी एम से 04:07 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 12:28 पी एम
एकादशी व्रत की पूजा विधि: एकादशी व्रत के दिन प्रातः उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं और सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। ध्यान रखें की एकादशी व्रत वाले दिन एकादशी व्रत की कथा जरूर पढ़ें। जिसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन किया जाता है। यह याद रखें कि द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद ही पारण करें।

