Varuthini Ekadashi 2020: हर महीने में दो एकादशी तिथि पड़ती हैं। लेकिन वैशाख मास में आने वाली वरूथिनी एकादशी को बेहद ही खास माना गया है। क्योंकि वैशाख माह भगावन विष्णु का प्रिय माना गया है और एकादशी व्रत में भी विष्णु जी की ही पूजा होती है। 18 अप्रैल को एकादशी व्रत रखा जायेगा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जाने अनजाने किये गये पाप नष्ट हो जाते हैं।
वरूथिनी एकादशी की पूजा विधि: इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा की जाती है। इस व्रत के नियम दशमी तिथि से ही शुरू हो जाते हैं। दशमी के दिन एक बार ही पूजन करें। फिर एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। व्रत कथा पढ़ें और विष्णु जी की आरती उतारकर व्रत पूजा पूर्ण करें। फिर अगले दिन एक बार फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और दान-दक्षिणा देकर व्रत खोल लें।
वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा: नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा की राज था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुए और उनके पैर को चबाते हुए भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। तब राजा मान्धाता ने भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट ने चक्र से भालू को मार डाला।
राजा का पैर भालू खा चुका था और वह इस बात को लेकर वह बहुत परेशान हो गए। दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- ‘हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करों। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।

