Ekadashi 2020: हर महीने में दो एकादशी आती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। ये एकादशी होली (Holi) से पहले आती है। जो इस बार 6 मार्च को आयेगी। आमलकी यानी आंवला। आंवला को शास्त्रों में श्रेष्ठ माना गया है। कहा जाता है कि आंवले के पेड़ को भगवान विष्णु ने ही जन्म दिया था। इसलिए इस वृक्ष के हर एक भाग में ईश्वर का स्थान माना गया है।
कैसे रखें आमलकी एकादशी व्रत: सभी एकादशी व्रतों की तरह इस दिन भी व्रती को दशमी तिथि से ही व्रत के नियमों का पालन करना होता है। एकादशी व्रत से एक दिन पहले भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। फिर व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी करें। जिसके लिए विष्णु जी की प्रतिमा लें उसके समक्ष अपने हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और थोड़ा जल लेकर व्रत करने का संकल्प लें। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
व्रत का संकल्प लेने के बाद षोड्षोपचार सहित भगवान की पूजा करें। भगवान की पूजा करने के बाद इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा भी जरूर करें। इसके लिए वृक्ष के पेड़ के चारों तरफ सफाई कर लें और उसके आस पास गाय का गोबर लगाकर उस जगह को पवित्र कर लें। पेड़ की जड़ में वेदी बनाएं और उसमें कलश की स्थापना करें। कलश में देवताओं को आमंत्रित करें। कलश में सुगंधी और पंत रत्न रखें। फिर दीपक जलाएं। इस व्रत को फलाहार लेकर रखा जाता है। रात्रि पर भगवान विष्णु की अराधना की जाती है। फिर द्वादशी तिथि को सुबह फिर से विष्णु जी की पूजा कर ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दान दक्षिणा देने के बाद व्रत को खोल लिया जाता है।
ऐसे करें एकादशी व्रत का पारण: एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर यानी व्रत के अगले दिन किया जाता है। लेकिन इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही हो तो भी एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। ध्यान रखें कि एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी न करें। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि को कहते हैं।
