ज्योतिष के मुताबिक कुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का प्रभाव हर जातक पर पड़ता है। कुंडली में स्थित ऐसे ग्रहों के कारण जातक को घर-परिवार में कलह होता रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा के साथ शनि-राहु बैठ गया तो जातक पीड़ित हो जाता है। जिस कारण मन दुखी रहता है। ऐसे जातक में निर्णय लेने की क्षमता कम रहती है। साथ ही ऐसे जातकों का जीवन विवादों से घिरा होता है। इसके अलावा ऐसे जातक दरिद्रता से घिरे रहते हैं। आगे जानते हैं कि कुंडली के कैसे ग्रह दशा के कारण घर-परिवार में कलह होते हैं।
ज्योतिष के जानकारों के मुताबित कुंडली में कहीं भी सूर्य और चंद्र की युति, राहु-केतु से हो तो ये दोष का निर्माण करते हैं। अक्सर कुछ घर, ऑफिस या अन्य जो कार्यस्थल है वहां तनाव का एक माहौल बना रहता है। घर के सदस्यों के बीच लड़ाई-झगड़ा होते रहते हैं। इसे ज्यादातर लोग सामान्य तनाव समझते हैं लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये जो तनाव होते हैं ये कोई मामूली तनाव नहीं होते हैं। इसके पीछे ग्रह की स्थिति बहुत जिम्मेदार होते हैं।
यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा पाप ग्रह से युक्त हो तो योग आपको घर-परिवार में कलह का कारण बनता है। ये योग आपके मन को आपके वश में नहीं रहने देते हैं। साथ ही आपके निर्णय लेने की क्षमता को कम कर देते हैं। यदि चंद्रमा पाप ग्रह के साथ राहु से युक्त होता है और पांचवें या फिर आठवें स्थान में हो तो कलह योग बनता है। ऐसे जातक को पूरा जीवन किसी न किसी बात को लेकर घर में कलह होता है। चंद्रमा में जब शनि, मंगल और राहु एक साथ आ जाता है तब भी कलह का योग बनता है।
जब कुंडली में चंद्रमा के साथ शनि-मंगल बैठ गया तो जातक पंडित होते हैं। अगर कुंडली में चंद्रमा के साथ शनि और राहु बैठ जाए तो जातक के मन में वैराग्य आ जाता है। साथ ही ऐसे लोग दुखी मन के होते हैं। ऐसे जातक में निर्णय लेने की क्षमता बहुत कम रहती है। इस कारण ये घर-परिवार में हमेशा विवादों से घिरे रहते हैं।

