Bhadrapada 2020: भगवान शिव के पसंदीदा माह सावन खत्म होने के साथ ही भादों मास की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने भादों के महीने में रोहिणी नक्षत्र के वृष लग्न में जन्म लिया था। इसके अलावा भी कई अन्य त्योहार इस महीने को खास बनाते हैं। सावन की तरह ही भादव का महीना भी बेहद पवित्र माना जाता है। भाद्रपद महीना 4 अगस्त से शुरू होकर 2 सितम्बर तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद का अर्थ होता है कि ये महीना बेहतर परिणाम देने वाले व्रतों का महीना है। इस महीने में लोग पूरे नियम और निष्ठा से उपवास करते हैं। आइए जानते हैं कि इस महीने में किन सावधानियों को बरतना जरूरी है –

इस महीने इन चीजों पर होती है पाबंदी: 
ज्योतिषियों के अनुसार भादों के महीने में किसी भी रविवार को चावल खाने से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
इस महीने में दही व कच्ची चीजें को खाना भी वर्जित माना जाता है।
– रविवार को नीले या काले रंग से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए। इन रंगों के आसपास रहने से आपको किसी प्रकार का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
– भादों के रविवार को बाल नहीं कटाना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से लोगों का सूर्य कमजोर हो जाता है। साथ ही, इस दिन सिर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए।
– भादों के रविवार को सूर्यास्त से पहले नमक का प्रयोग करना भी वर्जित माना जाता है। साथ ही, इस दिन तांबे से बनी चीजों का उपयोग न करें।

भगवान कृष्ण की होती है पूजा: भादों के महीने में श्री कृष्ण भगवान की अराधना विशेष रूप से की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये महीना उनका पसंदीदा माह है। भगवान कृष्ण का जन्म इसी महीने में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा का खास महत्व है। इस महीने में मुरली मनोहर को तुलसी अर्पित करना फायदेमंद बताया गया है। वहीं, पूरे महीने में श्री कृष्ण को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से लड्डू गोपाल भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। साथ ही श्रीमद्भग्वदगीता का पाठ भी शुभदायक होता है।

इन मंत्रों के जाप से हो सकता है लाभ:

– ॐ कृष्णाय नम:

-ॐ अच्युताय नम:

-ॐ अनन्ताय, नम:

-ॐ गोविन्दाय नम: