Dev Deepawali Shubh Muhurat and Puja Vidhi: देव दीपावली का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को देव दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 7 नवंबर को मनाया जा रहा है। वहीं इस दिन रवि और अभिजीत मुहूर्त का संयोग भी बन रहा है। इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। मान्यता अनुसार इस दिन देवता गण पृथ्वी पर आते हैं और काशी में दीवाली मनाते हैं। इसलिए इसे देव दीपावली कहा जाता है। इस दिन छह कृत्तिकाओं का पूजन करने का भी विधान है। 

जानिए तिथि

फ्यूचर पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक पूर्णिमा तिथि 7 नवंबर 2022 को शाम 4 बजकर 14 से आरंभ मिनट से हो रही है। वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 8 नवंबर को शाम 4 बजकर 32 मिनट पर हो रही है। वहीं 8 नवंबर को ग्रहण पड़ रहा है। इसलिए  देव दीपावली 07 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी। 

देव दीपावली शुभ मुहूर्त

शास्त्रों अनुसार इस दिन प्रदोष काल में दीप दान का महत्व होता है। इस दिन प्रदोष काल 5 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है और जो 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस बीच में आप दीपदान कर सकते हैं। वहीं इस दिन रवि योग का संयोग भी बन रहा है। रवि योग 7 नवंबर की सुबह 6 बजकर 37 मिनट से शुरू होगा जो कि अगले दिन 8 नवंबर की रात 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।

जानिए पूजा- विधि और कैसे करें दीपदान

देव दीपावली के दिन सुबह जल्दी स्नान कर लें और फिर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें। वहीं अगर संभव हो तो गंगा स्नान करें। क्योंकि इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। इसके बाद सूर्य को जल अर्पित करें, फिर तुलसी माता को जल अर्पित करें। वहीं इसके बाद भगवान शिव की पूजा- अर्चना करें। उनका अभिषेक करें। वहीं शाम के समय प्रदोष काल में 11, 21, 51 या 108 आटे या मिट्टी के दीया लें और उसमें शुद्ध घी या सरसों का तेल डालें। इसके बाद सभी दीपक को किसी नदी में विसर्जित कर दें या पास से किसी मंदिर में जाकर रख आएं।

इस दिन का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। जिसके बाद देवताओं ने काशी में अनेकों दीए जलाएं। इसलिए हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा पर काशी में दीपावाली मनाई जाती है। मान्यता है कि जो कोई इस दिन प्रदोष काल में नदी में दीपदान करता है, उसे सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन छह  कृत्तिकाओं (शिवा, सम्भूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा) का पूजन भी किया है। मान्यता है कि जो लोग इनका पूजन करते हैं, उनके संतान सुख के योग जल्दी बनते हैं।