हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को खास महत्व दिया गया है। जिसके अनुसार यह एक धार्मिक घटना है। वह चंद्र ग्रहण जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देता है उसका धार्मिक महत्व नहीं होता है। परंतु जो जिस चंद्र ग्रहण को हम खुली आंखों से देख सकते हैं उसका धार्मिक भी शास्त्रों में बताया गया है। साल 2019 में पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को लगा था। अगला चंद्र ग्रहण 17 जुलाई को लगने वाला है। जिसका सूतक काल 16 जुलाई को भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से शुरू हो जाएगा। बता दें कि यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा जिसे भारत में भी देखा जा सकेगा। आगे जानते हैं इस चंद्र ग्रहण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी। इस साल 17 जुलाई को लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत 16 जुलाई को दोपहर 03 बजकार 55 मिनट पर सूतक लगने के साथ होगी।

  • चंद्र ग्रहण प्रारंभ: 17 जुलाई 2019 रात्रि 01:32 बजे
  • सूतक काल की शुरुआत- 16 जुलाई दोपहर 03:55 बजे
  • ग्रहण समाप्त – 17 जुलाई 2019 शाम 04:29 बजे
  • बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों के लिए सूतक आरंभ- 16 जुलाई 2019 रात्रि 09:55 बजे
  • सूतक की समाप्ति: 17 जुलाई शाम 04:29 बजे।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

  • चंद्र ग्रहण के दौरान रोगी, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को छोड़कर घर के अन्य सदस्यों को भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि शास्त्रों में ऐसा करने की मनाही है।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ग्रहण की अवधि में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही है। इसलिए शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
  • ग्रहण की अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। साथ ही अपने इष्टदेव का ध्यान करना चाहिए।
  • ग्रहण-काल में शनि की साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति पाने के लिए शनि मंत्र का जाप और हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है।
  • कुंडली के मांगलिक दोष से छुटकारा पाने के लिए चंद्र ग्रहण के दिन सुंदरकांड का पाठ करना लाभकारी बताया गया है।
  • ग्रहण के दिन दान करने की भी मान्यता है। इसके लिए किसी जरूरतमंद को आटा, चावल, चीनी, सफेद कपड़े, साबुत उड़द की दाल, काला तिल और काला वस्त्र दान करना चाहिए।
  • ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के अशुभ फल को खत्म करने के लिए भी चंद्र ग्रहण शुभ है। इसके लिए ग्रहण काल के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, नवग्रह मंत्र, दुर्गा चालीसा, भागवत गीता, विष्णु सहस्त्रनाम आदि का पाठ करना चाहिए।