Chanakya Niti in Hindi: दुनिया भर में प्रसिद्ध आचार्य चाणक्य को महान राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ का दर्जा दिया गया है। कुशल समाजशास्त्री व अर्थशास्त्री चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में कई ऐसी बातों का जिक्र किया है जिसका महत्व वर्तमान समय में भी कम नहीं हुआ है। राजकाज के अलावा, चाणक्य की नीतियां गृहस्थ जीवन से जुड़ी कई बातें भी बताती हैं। इन नीतियों का अनुसरण करके लोग कई मुसीबतों को टाल सकते हैं। ये नीतियां न केवल लोगों को सफलता के रास्ते पर ले जाने में मददगार है बल्कि इनका पालन करके लोगों को व्यवहारिक ज्ञान की प्राप्ति भी होती है। चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से उन चीजों को जिक्र किया है जिसकी वजह से लोग दुखों से घिर सकते हैं।
अनवस्थितकायस्य न जने न वने सुखम्।
जनो दहति संसर्गाद् वनं संगविवर्जनात।।
इस श्लोक के जरिये आचार्य चाणक्य बताना चाहते हैं कि सुख पाने के लिए मन का शांत रहना बहुत जरूरी है। वैसे लोग जिनका मस्तिष्क शांत नहीं है उन्हें आसानी से सुख नसीब नहीं होता। जिन लोगों का चित्त स्थिर नहीं रहता है वो अक्सर दुखों से घिरे रहते हैं। चाणक्य के अनुसार चंचल मन दुख को बुलावा देता है। उसे किसी भी चीज में जल्दी खुशी दिखाई नहीं देती है।
इसके अलावा, चाणक्य कहते हैं कि संतोषी व्यक्ति ही असल सुख की अनुभूति कर पाता है। उनके अनुसार, जिसके मन में असंतोष की भावना रहती है, वो हर स्थिति में दुखी ही रहते हैं। वहीं, जिन्हें थोड़ी ही चीजों में संतुष्टि मिल जाती है उनके लिए सुख की प्राप्ति भी आसान बन जाती है। चाणक्य के अनुसार अगर आप में संतोष नहीं तो आपको कहीं भी खुशी नहीं मिलेगी। इसके अलावा, अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में हैं जो सदैव ही असंतुष्ट रहता है तो इसका असर आपके मस्तिष्क पर भी पड़ेगा और आप भी खुशियों से दूर होते जाएंगे।
आचार्य चाणक्य की मानें तो वो लोग भी खुशी से वंचित रहते हैं जो दूसरों को फलते-फूलते देखकर जल-भुन जाते हैं। जलन की भावना हर खुशी को नज़रअंदाज़ करने में सक्षम है। उनके अनुसार दूसरों की खुशियों को देखकर जलने वाले लोग न केवल दुखी रहते हैं बल्कि वो अकेलेपन का भी शिकार हो जाते हैं। समाज में रहने के बाद उनके सामाजिक रिश्ते मजबूत नहीं हो पाते हैं।

