Chanakya Niti In Hindi: चाणक्य नीति चाणक्य द्वारा रचित एक नीति ग्रंथ है। जिसमें जीवन को सुखमय और सफल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिये गये हैं। इस ग्रंथ का मुख्य विषय मानव समाज को जीवन के हर एक पहलू की व्यवहारिक शिक्षा देना है। चाणक्य एक महान ज्ञानी थे जिन्होंने अपनी नीतियों की बदौलत चंद्रगुप्त मौर्य को राजा की गद्दी पर बिठा दिया था। जानिए चाणक्य की कुछ ऐसी महत्वपूर्ण नीतियां जो आपको जीवन के किसी न किसी मोड़ पर काम आ सकती हैं…
– चाणक्य अनुसार कुछ लोगों की पहचान समय आने पर हो जाती है। जैसे किसी महत्वपूर्ण कार्य पर भेजते समय सेवक की पहचान, दुःख के समय में बन्धु-बान्धवों की, विपत्ति के समय मित्र की तथा धन नष्ट हो जाने पर पत्नी की परीक्षा होती है।
– ऐसा मित्र जो आपके मुंह पर तो अच्छा हो लेकिन पीठ पीछे आपकी बुराई करता हो उसका त्याग करने में ही आपकी भलाई है।
– जो मित्र नहीं उन पर पर विश्वास नहीं करना चाहिए और जो मित्र हैं उन पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए। कभी दुश्मनी होने पर मित्र भी आपकी गुप्त बातें सबको बता सकता है।
– मन में सोचे हुए कार्य को मुंह से बाहर नहीं निकालना चाहिए। मन्त्र के समान गुप्त रखकर उसकी रक्षा करनी चाहिए। क्योंकि किसी भी काम को गुप्त रखकर ही अच्छे से पूरा कर पायेंगे।
– किसके कुल में दोष नहीं होता? रोग किसे दुःखी नहीं करते? दुःख किसी नहीं मिलता और निरंतर सुखी कौन रहता है अर्थात कुछ न कुछ कमी तो सब जगह है और यह एक कड़वी सच्चाई है ।
– दुराचारी, दुष्ट स्वभाववाला, बिना किसी कारण दूसरों को हानि पहुँचानेवाला तथा दुष्ट व्यक्ति से मित्रता रखने वाला श्रेष्ठ पुरुष भी शीघ्र ही नष्ट हो जाते है क्यूोंकि संगति का प्रभाव बिना पड़े नहीं रहता है ।
– दुष्ट और साँप, इन दोनों में साँप अच्छा है, न कि दुष्ट । साँप तो एक ही बार डसता है, किन्तु दुष्ट तो पग-पग पर डसता रहता है ।
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– मूर्ख व्यक्ति को दो पैरोंवाला पशु समझकर त्याग देना चाहिए, क्योंकि वह अपने शब्दों से शूल के समान उसी तरह भेदता रहता है, जैसे अदृश्य कांटा चुभ जाता है|
– सांसारिक ताप से जलते हुए लोगों को तीन ही चीजें आराम दे सकती हैं – सन्तान, पत्नी तथा सज्जनों की संगति |
– जिस प्रकार बढ़िया-से बढ़िया भोजन बदहजमी में लाभ करने के स्थान में हानि पहुँचता है और विष का काम करता है, उसी प्रकार निरन्तर अभ्यास न रखने से शास्त्रज्ञान भी मनुष्य के लिए घातक विष के समान हो जाता है ।

