Chanakya Niti In Hindi: आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, समाजनीति के महान ज्ञाता थे। चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री चाणक्य ने अपनी नीतियों के दम पर ही नंदवंश का नाश करके चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। इन्होंने अपनी नीति के माध्यम से ही विदेशी शासक सिकंदर से भारत की रक्षा भी की। इनकी नीतियां बेहद ही व्यवहारिक और आज के समय में जीवन के हर मोड़ पर उपयोगी साबित होती हैं। जानिए चाणक्य की कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण नीतियां…

मन मलीन खल तीर्थ ये, यदि सौ बार नहाहिं ।
होयं शुध्द नहिं जिमि सुरा, बासन दीनेहु दाहिं ।

चाणक्य की इस नीति के अनुसार जिसके मन में पाप का वास हो गया है। वो चाहे कितनी भी कोशिश कर ले अपने आप को साफ दिखाने की लेकिन उसका मन नहीं बदल सकता। जैसे किसी बर्तन में रखी गई शराब आग में झुलसने के बाद भी पवित्र नहीं मानी जाती।

धर्मशील गुण नाहिं जेहिं, नहिं विद्या तप दान ।
मनुज रूप भुवि भार ते, विचरत मृग कर जान ।

चाणक्य अनुसार जिस व्यक्ति के अंदर ज्ञान, गुण और शील न हो ऐसा मनुष्य धरती पर एक बोझ के समान ही माना जाता है। ऐसे लोगों को जीने का कोई हक नहीं है।

बिन विचार खर्चा करें, झगरे बिनहिं सहाय ।
आतुर सब तिय में रहै, सोइ न बेगि नसाय ।

जो इंसान अपने पैसे को बेवजह खर्च कर रहा है तो उसे धन के महत्व के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे लोग स्वभाव से काफी झगड़ालू और स्त्रियों को परेशान करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्तियों का कब नाश हो जाए इसका अंदाजा वह खुद भी नहीं लगा सकते। इसलिए इन लोगों से दूर रहने में ही अपनी भलाई है।

लेन देन धन अन्न के, विद्या पढने माहिं ।
भोजन सखा विवाह में, तजै लाज सुख ताहिं ।

जो व्यक्ति लेन-देन, भोजन, धन-धान्य और व्यवहार में निर्लज है। ऐसा ही व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ता है। क्योंकि ऐसे व्यक्ति को लोग क्या सोचते हैं इस बात की परवाह नहीं होती। ये लोग अपने कार्यों को अपने मन से करते हैं।

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दानशक्ति प्रिय बोलिबो, धीरज उचित विचार ।
ये गुण सीखे ना मिलैं, स्वाभाविक हैं चार ।

व्यक्ति के अंदर कुछ गुण स्वंय उत्पन्न होते हैं। जैसे दान करना, मीठी बातें करना, लोगों की सेवा करना, समय पर सही गलत का निर्णय लेना। ये गुण जन्म से ही होते हैं इसे कोई और नहीं सिखा सकता।