आमतौर पर हर व्यक्ति अपने जीवन को सुखी बनाना चाहता है। इसके लिए वह तरह-तरह का प्रयास भी करता है। फिर भी न चाहते हुए भी मनुष्य को जीवन में दुखों का सामना करना पड़ता है। दुखों पर विजय प्राप्त कर सुखी जीवन जीने के लिए आचार्य चाणक्य ने अपने चाणक्य नीति में कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। चाणक्य नीति के अनुसार हर मनुष्य को दो स्थानों पर खामोश रहना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर वे कौन से दो स्थान हैं जहां चुप रहना ही हमारे लिए लाभकारी है? यदि नहीं तो आगे इसे चाणक्य नीति के अनुसार जानते हैं।
चाणक्य नीति में जीवन को सुखी बनाने के लिए कई बातों का जिक्र किया गया है। आचार्य चाणक्य ने ऐसे दो स्थानों के बारे में बताया है जहां हमेशा खामोश रखना चाहिए। चाणक्य बताते हैं कि इन स्थानों पर चुप बैठने वाला व्यक्ति जीवन भर सुखी रहता है। साथ ही अगर उन दो स्थानों पर व्यक्ति गलती से भी अपना हस्तक्षेप कर दिया तो आगे चलकर वह बहुत बड़ी मुसीबत में फंस सकता है।
चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य बताते हैं कि जहां पर लड़ाई-झगड़ा हो रहा हो उस जगह पर व्यक्ति को हमेशा खामोश रहना चाहिए। यदि किसी स्थान पर झगड़ा हो रहा है और आपका उससे कोई संबंध नहीं है तो आपको उसके बीच में कोई भी हस्तक्षेप गलती से भी नहीं करना चाहिए। अगर आपने गलती से भी उन लोगों के बीच में हस्तक्षेप किया तो आगे चलकर आपके ऊपर बहुत बड़ी मुसीबत आ सकती है। इसलिए झगड़े वाले स्थान पर मौन रहना ही अच्छा है।
आचार्य चाणक्य के अनुसार अगर किसी स्थान पर लोग खुद जी तारीफ खुद ही कर रहे होते हैं तो वैसे स्थान पर खामोश रहना चाहिए। साथ ही यदि किसी स्थान पर सभी लोग अपना अहंकार दिखा रहे हैं तो वहां पर आपको बिलकुल खामोश बैठना चाहिए। चाणक्य बताते हैं कि ऐसी जगह पर बोलने वाले व्यक्ति का अपमान होता है। साथ ही वे लोग आपको नीचा दिखाने की भी कोशिश करेंगे। इसलिए एक बुद्धिमान व्यक्ति को इन दो स्थानों पर हमेशा खामोश ही रहना चाहिए।
