Chanakya Niti In Hindi: आचार्य चाणक्य ने मानव समाज के कल्याण के लिए अपनी नीति पुस्तक में कई अहम बातें बताईं हैं। जिनका अनुसरण कर आप किसी भी तरह की परेशानी का हल निकाल सकते हैं। आचार्य चाणक्य को महान ज्ञाता, कुशल राजनितज्ञ और सफल अर्थशास्त्री माना जाता है। वैसे तो चाणक्य की ये नीतियां राजा महाराजाओं के समय की है लेकिन इसे आज के समय में भी काफी कारगर माना जाता है। चाणक्य के अनुसार बीमार होने पर, असमय शत्रु से घिर जाने पर, राजकार्य में सहायक रूप में तथा मृत्यु पर श्मशान भूमि में ले जाने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र और बन्धु होता है। आचार्य ने 4 प्रकार के मित्रों के बारे में बताया है जिनका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आइए जानते हैं-
विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्र गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्र धर्मो मित्रं मृतस्य।।
विद्या अंत तक रहती है साथ: चाणक्य नीति में लिखित इस श्लोक के जरिये आचार्य कहते हैं कि विद्या ही मनुष्य का सबसे बड़ा साथी है। चाणक्य के अनुसार घर से बाहर रहने पर, किसी संकट या जरूरत के समय में लोगों के पास अर्जित ज्ञान ही उनका साथ निभाता है। शिक्षित लोग मुश्किल के समय में अपने ज्ञान का इस्तेमाल करके उस परेशानी से बाहर निकल सकते हैं।
हमेशा साथ निभाती है जीवन संगिनी: चाणक्य के अनुसार किसी भी व्यक्ति की जीवन संगिनी उसकी सच्ची दोस्त होती है। अच्छी जीवनसाथी मिलने से न केवल लोगों का भविष्य बल्कि समाज में उनके कुल-परिवार का रुतबा भी बना रहता है। किसी भी मुश्किल में जीवन संगिनी चट्टान की तरह खड़ी हो जाती हैं। उनके साथ व सहयोग से मनुष्य किसी भी विपदा को झेलने में कामयाब होता है।
दवा का महत्व: चाणक्य ने औषधि यानि कि दवाइयों को मानव का तीसरा सबसे जरूरी मित्र बताया है। उनके अनुसार किसी भी बीमारी से निदान में व लोगों को स्वस्थ बनाए रखने में दवा की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। अस्वस्थ लोगों के लिए दवा ही सबसे अच्छा दोस्त हो सकता है क्योंकि अंत समय तक वो उनको भला करने में मदद करता है।
धर्म का साथ: आचार्य चाणक्य ने धर्म को भी लोगों का साथी कहा है। उनके अनुसार अपनने जीवन में किये हुए दान व पुण्य कर्म मरने के बाद भी लोगों के नाम के साथ ही रहते हैं। कोई भी व्यक्ति समाज में अपने कार्यों के वजह से ही जाना जाता है। अच्छे कर्म करने वाले लोगों को समाज सदैव ही याद रखता है।
