चैत्र नवरात्रि का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है और इन 9 दिन घर- घर मां दुर्गा की पूजा- अर्चना होती है। आपको बता दें कि इस साल चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू हो रहीं हैं और यह पर्व 11 अप्रैल तक मनाया जाएगा। लेकिन क्या आपको पता है नवरात्रि का पर्व व्रत- पूजा- उपासना के साथ-साथ वास्तु दोष दूर करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होते हैं। मान्यता है अगर इन दिनों वास्तु के उपाय कर लिए जाएं तो घर में सुख, समृद्धि बढ़ती है। आइए जानते हैं इन वास्तु उपायों के बारे में…
ईशान कोण में करें घट स्थापना:
नवरात्रि के पहले दिन ईशान कोण में घट स्थापना करना चाहिए। ईशान कोण उत्तर- पूर्व दिशा को माना जाता है। इस दिशा के आधिपत्य देव यानी दिग्पाल भगवान शिव हैं। शिव जी को ईशान भी कहा जाता है इसलिए भी इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा के स्वामी ग्रह बृहस्पति ग्रह है। इसलिए इस दिशा में घट स्थापना करने से घर में सुख- समृद्धि बढ़ती है। साथ ही आर्थिक मजबूती भी आती है।
आग्नेय दिशा में जलाएं अखंड ज्योत:
नवरात्रि में आग्नेय कोण में नवदुर्गा के सामने अखंड ज्योत जलानी चाहिए। आपको बता दें कि दक्षिण-पूर्व के मध्य स्थान को आग्नेय कोण कहा जाता है। इस दिशा पर अग्निदेव का आधिपत्य है तो वहीं इस दिशा के स्वामी ग्रह शुक्र देव हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार अखंड ज्योत जलाने से घर में से नकारात्मकता दूर होती है। साथ ही सदस्यों की बीमारियां दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
मुख्य द्वार पर बनाएं ये चिह्न:
वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान रोज घर के मुख्य द्वार पर माता लक्ष्मी के चरण अंदर की तरफ आते हुए बनाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद आपको प्राप्त होगा। साथ ही धन- वैभव में बढ़ोतरी होगी और आर्थिक स्थिति ठीक होगी। (यह भी पढ़ें)- शुक्र ग्रह करने जा रहे हैं कुंभ राशि में प्रवेश, इन 3 राशि वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन, हर कार्य में सफलता के योग
व्यापार में मिलेगी तरक्की:
चैत्र नवरात्रि के दौरान व्यापारी अपने ऑफिस-दुकान के मुख्य गेट पर एक बर्तन में पानी भरकर पूर्व या उत्तर दिशा में रख दें। साथ ही पानी में लाल और पीले फूल डाल दें। ऐसा करने से बिजनेस में अच्छी सफलता मिलती है और व्यापार में अच्छा मुनाफा हो सकता है। (यह भी पढ़ें)- Budh Ast 2022: व्यापार के दाता बुध देव हुए अस्त, इन 3 राशि वालों की बढ़ सकतीं हैं मुश्किलें
