चैत्र नवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। नवरात्रि के नौ दिन देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना की जाती है। हर साल ये नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होते हैं और इसी दिन से हिंदुओं के नये साल का आरंभ भी होता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार नवरात्र के नौ दिन देवी की विधिवत पूजा करने से सभी प्रकार के दुखों का नाश हो जाता है और घर परिवार में सुख और शांति आती है। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था।

नवरात्रि के पहले दिन घर में घट स्थापना की जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। कई लोग घटस्थापना के साथ नौ दिन अखंड ज्योति भी जलाते हैं। साथ ही नौ दिन देवी मां के उपवास किये जाते हैं जो लोग पूरे नौ दिन तक उपवास नहीं रख पाते वे शुरू और आखिरी के नवरात्र रखकर मां की अराधना करते हैं।

पहले नवरात्र की पूजा विधि: नवरात्र के दिन सुबह जल्दी उठ जाएं। नहा धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ सफाई कर लें। अब मंदिर में साफ सुथरी चौकी बिछाएं। गंगाजल छिड़क कर उस चौकी को पवित्र कर लें। चौकी के पास ही किसी बर्तन में मिट्टी डालकर जौ के बीज बो दें। इसके बाद मां अम्बे की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें और उन्हें रोली का तिलक लगाएं। नारियल पर भी तिलक लगाएं। मां को फूलों की माला पहनाएं। अब कलश स्थापना करने से पहले स्वास्तिक अवश्य बना लें। कलश में जल, अक्षत, सुपारी, रोली और मुद्रा डालें। फिर एक लाल रंग की चुनरी से लपेट कर उसे रख दें। कलश पर नारियल रखें।

नवरात्रि के नौ दिन कैसे करें पूजा?

– नौ दिन तक सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान कर साफ सुथरे कपड़े पहनें।

– नौ दिन तक एक बार सात्विक भोजन करें।

– माता को घर का बना हुआ भोग अर्पित करें या फिर दूध और फलों का भोग लगा सकते हैं।

– नौ दिनों तक घर के पूजा स्थल या फिर नजदीक के मंदिर में सुबह शाम गाय के घी का दीपक जलाएं।

– अगर संभव हो तो नौ दिनों तक छोटी कन्याओं को फल या कोई उपहार दें।

– नौ दिनों तक माता के बीज मंत्रों, चालीसा, आरती, स्त्रोत आदि का जाप करें।

– दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।