Chaitra Navratri 2019 3rd Day: अभी चैत्र का पावन माह चल रहा है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही चैत्र नवरात्रि शुरू होती है। नवरात्रि के नौ दिनों में आदि शक्ति देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। भक्त नौ दिनों तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं। साथ ही साथ नवरात्रि की पूरी अवधि में भक्त पूरे भक्ति भाव से देवी दुर्गा की आराधना करते हैं।

इस प्रकार भक्त चैत्र नवरात्रि में नौ दिन देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। साथ ही भगवती से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं। आगे हम जानते हैं कि मां दुर्गा को किन-किन देवताओं ने अपने अस्त्र और शस्त्र दिए। जिसके द्वारा देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया।

देवी भगवती ने असुरों का वध करने के लिए कई अवतार लिया। सबसे पहले महादुर्गा का अवतार लेकर देवी ने महिषासुर का वध किया था। साथ ही दुर्गा सप्तशती में देवी दुर्गा का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। जिसके अनुसार एक बार महिषासुर नामक असुरों के राजा ने अपने बल और पराक्रम से देवताओं से स्वर्ग छीन लिया था। जब सारे देवता भगवान शंकर व विष्णु के पास सहायता के लिए गए। पूरी बात जानकर शंकर और भगवान विष्णु को क्रोध आया। तब उनके तथा अन्य देवताओं के मुख से तेज प्रकट हुआ। जो नारी स्वरूप में परिवर्तित हो गया।

शिव के तेज से देवी का मुख, यमराज के तेज से केश, विष्णु के तेज से भुजाएं, चंद्रमा के तेज से वक्षस्थल, सूर्य के तेज से पैरों की अंगुलियां, कुबेर के तेज से नाखून, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से तीनों आंख, संध्या के तेज से भृकुटी और वायु के ताज से कानों की उत्पत्ति हुई। इसके बाद देवी को शास्त्रों और अस्त्रों से सुशोभित भी देवताओं ने ही किया। देवताओं से शक्तियां प्राप्त कर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को पुनः स्वर्ग सौंप दिया।

महिषासुर का वध करने के कारण उन्हें ही महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। देवी भागवत के अनुसार शक्ति को प्रसन्न करने के लिए देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र सहित कई शक्तियां उन्हें प्रदान की। इन सभी शक्तियों को प्राप्त कर देवी ने महाशक्ति का रूप ले लिया। भगवान शंकर ने मां दुर्गा को त्रिशूल भेंट किया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र प्रदान किया। वरुण देव ने शंख भेंट किया।

अग्नि देव ने अपनी शक्ति प्रदान की। इंद्र देव ने वज्र और घंटा अर्पित किया। यमराज ने कालदण्ड भेंट किया। प्रजापति दक्ष ने स्फटिक की माला दी। भगवान ब्रह्मा ने कमंडल भेंट किया। सूर्य देव ने माता को तेज प्रदान किया। समुद्र ने मां को उज्जवल हार, दिव्य वस्त्र, दिव्य चूड़ामणि, कुंडल, कड़े और ध्वजा और रत्नों की अंगूठियां भेंट की। इसके अलावा पर्वतराज हिमालय ने मां दुर्गा को सवारी करने के लिए शक्तिशाली शेर भेंट किया। वहीं कुबेर देव ने शहद से भरा पात्र मां को दिया। इस तरह विभिन्न देवताओं ने देवी दुर्गा को अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र भेंट किए।