Chaitra Navratri 2019 2nd Day, Maa Bharmacharini Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि 2019 की शुरुआत 06 अप्रैल, शनिवार को सिद्धि योग में हो गई है। वहीं इस महीने यह चैत्र नवरात्रि 14 अप्रैल, रविवार को समाप्त हो रही है। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन आदि शक्ति देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन से क्रमशः नौ दिनों तक मां के नौ विभिन्न स्वरूपों की पूजा जाती है। 7 अप्रैल, रविवार यानि आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा की दूसरी स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। शास्त्रों में कहा गया है इनकी पूजा से सर्वार्थसिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। आगे जानते हैं ब्रह्मचारिणी माता की पूजा-विधि और मंत्र।

मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा विधि:
देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा में सर्वप्रथम माता की फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें तथा उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को प्रसाद अर्पित करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें।

देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें-

इधाना कदपद्माभ्याममक्षमालाक कमण्डलु
देवी प्रसिदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा

इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल और कमल बेहद प्रिय होते हैं इसलिए इन फूलों की माला पहनाएं, घी और कपूर मिलाकर देवी की आरती करें।

स्तोत्र पाठ: 
तपश्चारिणीं त्वां हि तापत्रयनिवारिणीम् । ब्रह्मरूपधरां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम ।।
नवचक्रभेदिनीं त्वां नवैश्वर्यप्रदायनीम् । धनदां सुखदां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम् ।।
शंकरस्य प्रिया त्वं हि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी । शान्तिदामानन्दां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम् ।।

ब्रह्मचारिणी की कवच:

त्रिपुरा हृदये पातु ललाटे शिवभामिनी । अपर्णा मे सदा पातु नेत्रेSधरे कपोलके ॥
पंचदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे महेश्वरी । षोडशी मे सदा पातु नाभौ गुदं च पादयोः ।
अंगं च सततं पातु प्रत्यंगं ब्रह्मचारिणी ।।