Chaitra Amavasya Ke Upay: 24 मार्च को चैत्र अमावस्या है। इसके बाद से मां दुर्गा की अराधना के नौ दिन नवरात्रि (Navratri) शुरू हो जायेंगे। वैसे तो हर महीने में अमावस्या तिथि आती है लेकिन चैत्र माह में आने वाली इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह हिंदू वर्ष की आखिरी तिथि भी होती है। इसके बाद से हिंदुओं का नया साल (Hindi Nav Varsh) शुरू हो जाता है। माना जाता है कि अमावस्या पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है।
चैत्र अमावस्या मुहूर्त (Chaitra Amavasya Muhurat):
प्रारंभ- 12.30 पी एम, मार्च 23
समाप्त- 02:27, मार्च 24
सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:01 ए एम से 04:19 ए एम, मार्च 25 तक
अभिजित मुहूर्त: 11:40 ए एम से 12:28 पी एम
चैत्र अमावस्या की पूजा विधि (Chaitra Amavasya Puja Vidhi):
– इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं।
– ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, जलाशय या कुंड में स्नान करें।
– सूर्योदय के समय भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित जरूर करें।
– इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपाय किये जाते हैं। इसके लिए कई लोग अमावस्या पर व्रत भी रखते हैं।
– इस दिन किसी पवित्र नदी या सरोवर में पितरों की शांति के लिए स्नान किया जाता है और तिल नदी में प्रवाहित किये जाते हैं।
– जहां पितरों की तस्वीर लगी हुई है उसके नीचे के स्थान को साफ कर लें। उसके बाद वहां देशी घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूर्वज की तस्वीर को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और उन्हें सफेद फूल अर्पित करें।
– उसके बाद भगवान से पितरों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करें। उन्हें खीर और पूरी का भोग लगाएं।
– जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा जरूर दें और ब्राह्माणों को भोजन भी कराएं उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
– अंत में पितरों को भोग लगाई खीर और पूरी को किसी गाय को खिला दें और प्रसाद स्वरूप उसे खुद भी ग्रहण करें।
चैत्र अमावस्या की कथा (Chaitra Amavasya Katha): पौराणिक कथा के अनुसार एक नगरी में एक राजा राज करता था। उसकी प्रजा और परिवार के लोग सुखी थे। राजा की रानी बहुत ही धार्मिक विचारो की थी। राजा के महल के सामने ही एक साहूकार की हवेली थी।राजा और साहूकार की पत्नी में आपस में घनिष्ठ मित्रता थी। एक बार साहूकार की हवेली से उसकी पत्नी की रोने की आवाज आने लगी। इसके बाद रानी ने राजा से इसका कारण पूछा तो राजा ने कहा कि सेठ का पुत्र मर गया है।
इस पर रानी ने कहा कि महाराज दुख क्या होता है जो सेठ की पत्नी रो रही है। इस पर राजा न कहा कि जब तुम्हारा बेटा मरेगा तब तुम्हें पता चल जाएगा। इसके बाद रानी ने अपने बेटे को महल से नीचे फेंक दिया। लेकिन भगवान की कृपा से वह बच गया। रानी ने फिर राजा से पूछा कि दुख क्या होता है। तब राजा ने कहा कि पड़ोसी राज में युद्ध हो रहा है मैं भी उस युद्ध में अकेला जाऊंगा।जब तुम मेरे मरने का समाचार सुनोगी तब तुम्हें पता चलेगा।
लेकिन रानी अमावस्या का व्रत करती थी। जिसकी वजह से राजा उस युद्ध को जीतकर वापस आ गया।इसके बाद राजा ने रानी से कहा कि अब हम गंगा मां के दर्शन करने जाएंगे। तब मैं वहां जाकर गंगा नदी में कूद जाऊंगा तब तुम्हें दुख का पता चलेगा। भगवान शिव कैलाश पर बैठकर यह सब देख रहे थे। उन्होंने माता पार्वती से कहा कि आज मैं तुम्हें सुखी आत्मा के दर्शन करवाऊंगा।जिसके बाद भगवान शिव ने बकरे और माता पार्वती ने बकरी का रूप धारण कर लिया।
जिसके बाद वह एक बावली के पास घास चरने लगे। रानी ने जब उस बावली को देखा तो उसने कहा कि हम यही पर विश्राम करेंगे। रानी ने भगवान शिव और माता पार्वती की बाते सुन ली जिसमें भगवान शिव माता पार्वती को कह रहे थे कि रानी ने अमावस्या का व्रत किया है। इसलिए इसे इस जन्म में कोई दुख नहीं मिलेगा। जिसके बाद रानी को सबकुछ समझ आ गया। उसने यह बात राजा को भी बताई।

